डोनाल्ड ट्रंप और व्लॉदिमीर पुतिन (सौ. Social Media )  
विदेश

पुतिन ने अंग्रेजी में दे डाला ट्रंप को रूस आने का निमंत्रण, इस अंदाज को देख चौंके अमेरिकी राष्ट्रपति

Putin Trumph Meeting: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को अलास्का के एंकोरेज में तीन घंटे तक बातचीत की। इस मुलाकात में कई गंभीर मुद्दों पर वार्ता हुई।

गीतांजली शर्मा

Donald Trump & Vladimir Putin Alaska Meeting: बीते शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अलास्का के एंकोरेज में तीन घंटे की मीटिंग की। इस मीटिंग में दोनों देशों के आपसी संबंध, वर्तमान में विश्व स्तर पर चल रही समस्याओं और उसके निदान पर परिचर्चा की। मीटिंग के बाद ट्रंप ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि हम आपसी वार्ता के बाद  जिस समझौते पर पहुंचे हैं, वह हमें उस लक्ष्य  के और करीब ले जाएगा, जिसकी कामना दोनों देश की जनता करती है।

यह वार्ता निसंदेह ही  यूक्रेन में शांति के द्वार खोलेगा। ट्रंप के अनुसार पुतिन के साथ की गई उनकी बैठक बहुत ही उपयोगी रही। दोनों के बीच की गई बातचीत में बहुत से मुद्दों पर पुतिन व ट्रंप की आपसी सहमति बड़ी आसानी से बन गई।

दोनों नेताओं ने की मात्र 12 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस

दोनों नेताओं ने आपसी वार्ता के बाद अलस्का में 12 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंसिग की। इस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने किसी सवाल का जबाव नहीं दिया बस तरीके से पूरे पॉजिटिव एनर्जी के साथ प्रेस को संबोधित किया।

कॉन्फ्रेंस के अंत का दिलचस्प पल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में दोनों देशों के राष्ट्रपति मजाकिया अंदाज में दिखे। जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा जल्द ही मिलते हैं तो इस पर हास्यप्रद अंदाज में अंग्रेजी जबाव देते हुए पुतिन ने कहा नेक्सट टाइम इन मॉस्को। पुतिन के इस चुटकी भरे अंदाज पर ट्रंप भी हंसे बिना नहीं रह सके और उन्होंने कह डाला दैस्ट्स द इंट्रेस्टिंग वन-यानि जबाव बढ़िया था। इस तरह दोनों देशों के मुखिया ने वर्तमान समय के गंभीर मुद्दों पर परिचर्चा के बाद कॉन्फ्रेंस मीटिंग को हल्के -फुल्के अंदाज में अगली मुलाकात के साथ विराम दिया।

हमारी मुलाकात रचेगी इतिहास- पुतिन

अलास्का में हुए अमेरिका-रूस चर्चा, परिचर्चा को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बेहद अहम माना है। उनका कहना था कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान दोनों देशों ने एक दूसरे की बहुत मदद की। दुश्मन देशों के साथ मिलकर लड़ाई लड़ी और अपने देश का वर्चस्व बनाए रखा। आज के समय में रिश्ते थोड़े ऊपर नीचे हुए। पर इस मुलाकात ने वो बीच में आए संवादीय दूरी को पाटने का काम किया है। आगे भविष्य में यह तय है कि दोनों देशों के रिश्ते मधुर होंगे और आने वाले कल में नया इतिहास रचा जाएगा।

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