PM Modi On Middle East Tension: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी इस समय भारत आए हुए हैं, मार्क कार्नी की यह यात्रा कई मायनों में खास है। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात की, साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्क कार्नी के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित भी किया।
कनाडा और भारत के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनमें महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग भी शामिल है। असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति पर सहमति बनी है। समझौते के तहत कनाडा, भारत को यूरेनियम की आपूर्ति करेगा। दोनों देश लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) और उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकी पर भी साथ काम करेंगे। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर भी चर्चा की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "विश्व में जारी कई तनावों पर भारत का रुख स्पष्ट है, हमने हमेशा शांति और स्थिरता बनाए रखने का आह्वान किया है, और जब दो लोकतांत्रिक देश एक साथ खड़े होते हैं, तो शांति की आवाज और भी मजबूत हो जाती है। पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति हमारे लिए गहरी चिंता का विषय है।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि भारत सभी विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन करता है। हम इस क्षेत्र में सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी देशों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे।"
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इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फोन पर बात कर चुके हैं और दोनों ही देशों को पीएम मोदी ने साथ खड़े रहने का भरोसा भी दिलाया है। इसकी जानकारी पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भी साझा की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए पीएम मोदी लिखते हैं कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा करने के लिए टेलीफोन पर बात हुई। हाल के घटनाक्रमों पर भारत की चिंताओं से अवगत कराया और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। भारत ने शत्रुता को शीघ्र समाप्त करने की आवश्यकता को दोहराया।
इसके अलावा पीएम मोदी ने एक और पोस्ट साझा किया जिसमें उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद के साथ बातचीत की जानकारी दी और यूएई पर हुए हमले की निंदा की।
यानी भारत ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि भारत हमेशा से ही शांति का पक्षधर रहा है और भारत ने हमेशा डिप्लोमेसी के जरिए ही सभी विवादों को सुलझाने का समर्थन किया है।