PM Modi Proposing BRICS Roadmap For Reform: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट के दौरान ग्लोबल गवर्नेंस सिस्टम में सुधार का 10 सूत्री रोडमैप पेश किया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को ग्लोबल डिसीजन मेकिंग सेंटर्स में अधिक इफेक्टिव और मजबूत भूमिका मिलनी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्क्लूसिव ग्लोबल गवर्नेंस एंड स्ट्रेंथनिंग मल्टीलेटरलिज्म विषय पर आयोजित ब्रिक्स सेशन को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने मौजूदा ग्लोबल गवर्नेंस सिस्टम को पिरामिड जैसी स्ट्रक्चर बताया।
पीएम मोदी के अनुसार इस सिस्टम में डिसीजन मेकिंग की पावर मुख्य रूप से टॉप लेवल पर केंद्रित है, जबकि निचले स्तर पर वे देश हैं जो इन फैसलों से सीधे प्रभावित होते हैं। उन्होंने इस असंतुलन को बदलने की जरूरत पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह असंतुलन डेवलपिंग कंट्रीज यानी ग्लोबल साउथ के लिए विशेष रूप से चिंता का विषय है। ग्लोबल साउथ कई ग्लोबल क्राइसिस से सीधे प्रभावित होता है, लेकिन प्रमुख डिसीजन मेकिंग फोरम्स पर उसकी पार्टिसिपेशन लिमिटेड रहती है।
पीएम मोदी ने मौजूदा प्रिविलेज-बेस्ड पिरामिड को सभी देशों की रियल पार्टिसिपेशन वाले प्लेटफॉर्म में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल सिस्टम ऐसी होनी चाहिए, जिसमें सभी देशों की आवाज और पार्टिसिपेशन को महत्व मिले।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर दुनिया का फ्यूचर साझा है तो उसे शेप देने का अधिकार भी सभी देशों के पास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आवाज से इम्पैक्ट और प्रिविलेज से पार्टनरशिप की ओर बढ़ना ब्रिक्स का गाइडिंग रिजॉल्यूशन होना चाहिए।
इसी सोच के तहत उन्होंने ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म के लिए 10 ठोस प्रपोजल तैयार करने का सुझाव दिया। पीएम मोदी ने प्रपोज किया कि अगले ब्रिक्स समिट तक इन सुझावों को एक व्यापक रिफॉर्म रोडमैप में बदला जाए।
पीएम मोदी ने इस रिफॉर्म प्रोसेस के लिए रिप्रेजेंटेशन, अकाउंटेबिलिटी और रूल मेकिंग को तीन प्रमुख आधार बताया। रिप्रेजेंटेशन के तहत उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रिफॉर्म की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि UN सिक्योरिटी काउंसिल रिफॉर्म को अब और टाला नहीं जा सकता। इसके लिए बातचीत को स्पष्ट टाइमलाइन और ठोस रिजल्ट्स से जोड़ने की जरूरत है।
वहीं फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस में वोटिंग राइट्स और लीडरशिप पोजिशंस को मौजूदा ग्लोबल इकोनॉमिक रियलिटीज के अनुरूप बनाने की बात भी प्रधानमंत्री ने कही।
अकाउंटेबिलिटी के तहत पीएम मोदी ने कलेक्टिव रिस्पॉन्स और इम्पैक्ट को मजबूत करने के लिए सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क बनाने की वकालत की। इसका उद्देश्य जरूरत के समय नाविकों के लिए बेहतर इमरजेंसी असिस्टेंस सिस्टम तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल इंस्टीट्यूशंस और सिस्टम्स में अकाउंटेबिलिटी बढ़ाने के लिए ऐसे कोऑपरेटिव मैकेनिज्म डेवलप किए जाने चाहिए, जो विभिन्न देशों के साझा हितों को ध्यान में रखें।
रूल मेकिंग के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, साइबर स्पेस, स्पेस और बायोटेक्नोलॉजी जैसी इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के रूल्स फ्यूचर के डेवलपमेंट और ग्लोबल सिस्टम को प्रभावित करेंगे।
ऐसे में इन टेक्नोलॉजीज के ग्लोबल रूल्स तैयार करने में डेवलपिंग कंट्रीज की समान पार्टिसिपेशन जरूरी है। भारत का यह प्रपोजल ब्रिक्स के जरिए ग्लोबल साउथ की आवाज को ग्लोबल पॉलिसी मेकिंग में अधिक इफेक्टिव बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर सामने आया है।