इजरायली संसद 'नेसेट' में पीएम मोदी का ऐतिहासिक संबोधन (सोर्स- सोशल मीडिया)  
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इजरायली संसद 'नेसेट' में पीएम मोदी का ऐतिहासिक संबोधन… भारत-इजरायल दोस्ती के नए युग की शुरुआत

Modi Knesset Speech: प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायली संसद 'नेसेट' को संबोधित कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों पर जोर दिया है।

प्रिया सिंह

India Israel Strategic Cooperation: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी दो दिवसीय इजरायल यात्रा के दौरान यरूशलम स्थित संसद 'नेसेट' को संबोधित किया, जिससे वे ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं। इस दौरान नेसेट के अध्यक्ष अमीर ओहाना ने उनका भव्य स्वागत किया और उन्हें 'स्पीकर ऑफ द नेसेट' मेडल से सम्मानित कर गौरव प्रदान किया। भारत और इजरायल के बीच यह संबोधन न केवल कूटनीतिक बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक भी माना जा रहा है।

ऐतिहासिक उपलब्धि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेसेट में संबोधन भारत और इजरायल के कूटनीतिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। उनसे पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्ष के नेता यायर लापिड ने सदन में अपनी बात रखी। सभी नेताओं ने एक स्वर में भारत के साथ मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के प्रति अपना अटूट समर्थन व्यक्त किया है।

साझा लोकतांत्रिक परंपरा

पीएम मोदी ने अपने भाषण में 'स्पीकर ऑफ द नेसेट' मेडल प्राप्त करने पर आभार जताते हुए इसे दोनों देशों की दोस्ती को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि भारत और इजरायल की साझेदारी प्राचीन सभ्यताओं के संबंधों और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों की नींव पर टिकी हुई है। दोनों देशों के बीच प्रौद्योगिकी, रक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक समानताएं लगातार बढ़ रही हैं।

जन-से-जन संपर्क

प्रधानमंत्री ने कृषि, जल प्रबंधन और ग्रामीण विकास में चल रहे सहयोग को रेखांकित करते हुए जन-से-जन संबंधों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इजरायल में बसे भारतीय समुदाय और भारत में रहने वाले यहूदी प्रवासियों के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। इन समुदायों ने दोनों देशों की प्रगति और संस्कृति को समृद्ध बनाने में अपनी ऐतिहासिक भूमिका बखूबी निभाई है।

आतंकवाद पर प्रहार

आतंकवाद के खिलाफ भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को दोहराते हुए मोदी ने 7 अक्टूबर के क्रूर आतंकी हमले पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्दोषों के खिलाफ ऐसी हिंसा और क्रूरता का किसी भी परिस्थिति में कोई औचित्य नहीं हो सकता। भारत ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की गाजा शांति पहल का समर्थन किया।

आर्थिक सहयोग का विस्तार

प्रधानमंत्री ने बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाते हुए इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) और आईटूयूटू ढांचे को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने भारत की विकास गाथा का जिक्र करते हुए निवेश, बुनियादी ढांचे और डिजिटल समाधानों में द्विपक्षीय भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। युवाओं की रचनात्मकता को नई दिशा देने के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश करना अनिवार्य है।

भविष्य की योजनाएं

व्यापारिक क्षमता को पूरी तरह से साकार करने के लिए पीएम मोदी ने महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने का आग्रह किया। उन्होंने द्विपक्षीय निवेश संधि के निष्कर्ष पर अपनी खुशी जाहिर की और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की इच्छा जताई। यह समझौता दोनों देशों के व्यापारियों और उद्यमियों के लिए विकास के नए द्वार खोलने में सहायक होगा।

सांस्कृतिक समानताएं

भारतीय दर्शन के 'वसुधैव कुटुंबकम' और इजरायल के 'टिक्कुन ओलम' सिद्धांतों के बीच समानता का उल्लेख करते हुए उन्होंने विश्व कल्याण की बात की। ये दोनों ही सिद्धांत एक बेहतर और समरस समाज बनाने की साझा वैश्विक दृष्टि को बहुत ही खूबसूरती से दर्शाते हैं। अंत में उन्होंने नेसेट के सदस्यों को धन्यवाद दिया और आगामी पुरिम पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

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