पीटर मग्यार, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

हंगरी में 16 साल के ओर्बन राज का अंत, पीटर मग्यार ने ली प्रधानमंत्री पद की शपथ; क्या अब बदलेगी देश की दिशा?

Peter Magyar Hungary PM: पीटर मग्यार ने हंगरी के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर विक्टर ओर्बन के 16 साल लंबे शासन को समाप्त कर दिया है। उनकी पार्टी तिस्जा ने चुनाव में भारी बहुमत हासिल किया है।

अमन उपाध्याय

Peter Magyar Hungary PM News In Hindi: 9 मई 2026 को पीटर मग्यार ने हंगरी के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर विक्टर ओर्बन के 16 साल पुराने शासन का अंत कर दिया है। बुडापेस्ट के संसद भवन में आयोजित समारोह में उन्होंने इस बदलाव को देश के लिए एक नई शुरुआत बताया और नागरिकों से एक नए युग में कदम रखने के लिए आमंत्रित किया।

चुनावी नतीजों में तिस्जा का दबदबा

पीटर मग्यार के नेतृत्व वाली केंद्र-दक्षिणपंथी तिस्जा पार्टी ने संसदीय चुनावों में 199 में से 141 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया है। मग्यार का प्रधानमंत्री बनने का सफर बेहद दिलचस्प रहा है, क्योंकि साल 2024 की शुरुआत तक वे राजनीति में गुमनाम थे, लेकिन ओर्बन की सत्ताधारी पार्टी से विवाद के बाद वे एक ताकतवर विपक्षी नेता के रूप में उभरे और सत्ता तक पहुंचे।

यूरोपीय संघ के साथ संबंधों में सुधार

प्रधानमंत्री मग्यार के पदभार संभालते ही हंगरी की संसद में 12 साल बाद फिर से यूरोपीय संघ का झंडा लगाया गया है, जो यूरोप के साथ रिश्तों में सुधार का एक बड़ा संकेत है। इस प्रतीकात्मक बदलाव का मुख्य उद्देश्य यूरोपीय संघ के साथ पिछले तनाव को खत्म करना है ताकि वहां से मिलने वाली लगभग 20 अरब डॉलर की रुकी हुई फंडिंग को दोबारा शुरू कराया जा सके।

मग्यार के सामने खड़ी प्रमुख चुनौतियां

भले ही मग्यार ने सत्ता संभाल ली है लेकिन उनके सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। ओर्बन के लंबे शासनकाल के दौरान हंगरी का प्रशासन काफी बदल चुका है। जिसे विशेषज्ञों के अनुसार 'उखाड़ फेंकना' एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी।

आर्थिक मोर्चे पर, मग्यार को देश की सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाना होगा। इसके अलावा, अप्रैल तक हंगरी का बजट घाटा अपने वार्षिक लक्ष्य के लगभग तीन-चौथाई तक पहुंच गया था। जिससे निपटना नए प्रशासन के लिए प्राथमिकता होगी।

बदली हुई विदेश नीति की उम्मीद

विक्टर ओर्बन के शासनकाल में हंगरी ने यूरोपीय संघ से दूरी बनाकर रूस के साथ नजदीकी बढ़ाई थी, जिससे पश्चिमी देशों के साथ संबंधों और यूक्रेन युद्ध से जुड़ी नीतियों पर गहरा असर पड़ा। अब पीटर मग्यार के नेतृत्व में हंगरी के फिर से यूरोपीय सहयोगियों के करीब आने की उम्मीद है, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें अपनी कार्यप्रणाली को पिछले प्रशासन से पूरी तरह अलग साबित करने की चुनौती का सामना करना होगा।

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