Peru-US F-16 Fighter Jet Deal Controversy: पेरू में F-16 फाइटिंग फाल्कन लड़ाकू विमानों की खरीद से जुड़ा बड़ा रक्षा सौदा राजनीतिक संकट का कारण बन गया है। अंतरिम सरकार द्वारा इस 3.5 अरब डॉलर के प्रस्तावित समझौते को रोकने के बाद देश में उच्च स्तर पर इस्तीफों की झड़ी लग गई है। वहीं अमरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने पेरू को धमकी दी है।
पेरू के अंतरिम राष्ट्रपति जोस मारिया बाल्काजर ने निर्णय लिया था कि इतने बड़े रक्षा सौदे को मौजूदा अस्थायी सरकार द्वारा आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा, इसलिए इसे अगली चुनी हुई सरकार पर छोड़ दिया जाए। यह सौदा लॉकहीड मार्टिन के साथ 24 F-16 लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर था।
इस फैसले के बाद पेरू के विदेश मंत्री ह्यूगो डे जेला और रक्षा मंत्री कार्लोस डियाज ने इस्तीफा दे दिया। दोनों का कहना था कि इस डील को रोकना देश की अंतरराष्ट्रीय साख और सुरक्षा रणनीति के लिए नुकसानदायक हो सकता है, खासकर जब समझौते पर पहले ही बातचीत आगे बढ़ चुकी थी। दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रपति के फैसले के बावजूद पेरू के वित्त मंत्रालय ने अमेरिकी कंपनी को लगभग 462 मिलियन डॉलर की राशि ट्रांसफर कर दी, जिससे सरकार के भीतर भ्रम और विवाद और बढ़ गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पेरू में पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। हाल ही में हुए चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिसके चलते अब देश में 7 जून को रन-ऑफ चुनाव कराए जाएंगे। इस विवाद में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का पहलू भी जुड़ गया है। पेरू में तैनात अमेरिकी राजदूत बर्नार्डो नवारो ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका अपने हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
यह पूरा मामला केवल रक्षा सौदे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वैश्विक शक्ति संतुलन की राजनीति भी जुड़ी है। एक ओर अमेरिका चाहता है कि पेरू उसके साथ सैन्य रूप से अधिक जुड़ा रहे, जबकि दूसरी ओर चीन ने पिछले वर्षों में पेरू में निवेश बढ़ाकर खासकर बंदरगाह परियोजनाओं के जरिए अपनी मौजूदगी मजबूत की है।
यह भी पढ़ें- मिसाइल बने बाराती…ड्रोन बने गवाह, ईरान में हर रात होने वाली रैली में अनोखी शादी कर रहे लोग, देखें VIDEO
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह F-16 सौदा आगे बढ़ता है तो पेरू अगले कई दशकों तक अमेरिकी रक्षा ढांचे से जुड़ा रह सकता है। इसी वजह से पेरू अब अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है, जहां आर्थिक और सैन्य प्रभाव दोनों के लिए तीखी होड़ चल रही है।