Palestine Peace Mission India Reiterates Support: भारत और फिलिस्तीन के बीच गहरी दोस्ती को और मजबूत करने के लिए रामल्लाह में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक आयोजित की गई है। भारत की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने फिलिस्तीन की अपनी पहली यात्रा के दौरान वहां की विदेश मंत्री डॉ. वारसेन शाहिन से मुलाकात की और कड़ा भरोसा दिया।
इस बैठक के दौरान भारत ने गाजा की वर्तमान गंभीर स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। सचिव रंगनाथन ने फिलिस्तीन के नागरिकों के लिए भारत के अटूट कूटनीतिक समर्थन को दोहराया और गाजा के प्रभावित लोगों तक सुरक्षित, निरंतर और बिना किसी बाधा के मानवीय मदद पहुंचाने पर जोर दिया।
भारत ने रामल्लाह में आयोजित इस बैठक में जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच कड़े संघर्ष को समाप्त करने और क्षेत्र में स्थायी स्थिरता लाने के लिए शांति ही एकमात्र रास्ता है। इसके साथ ही भारत ने बातचीत और कूटनीति के माध्यम से दो-राज्य समाधान के प्रति अपना पूर्ण समर्थन दोहराया।
फिलिस्तीन की विदेश मंत्री डॉ. वारसेन अगाबेकियन शाहिन ने इस अवसर पर भारत के लगातार और कूटनीतिक रूप से कड़े समर्थन की काफी सराहना की है। उन्होंने इस वर्ष जनवरी में भारत की अपनी बेहद सफल यात्रा को याद किया और भारत द्वारा किए जा रहे अमूल्य विकास कार्यों का आभार व्यक्त किया।
बैठक में दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य, शिक्षा और क्षमता निर्माण से जुड़ी कूटनीतिक पहलों की प्रगति की बारीकी से समीक्षा की। फिलिस्तीनी जरूरतों को पूरा करने में भारत के समृद्ध विकास संबंधी अनुभवों से मिलने वाली सहायता के नए क्षेत्रों पर भी गहराई से चर्चा की गई, जो बहुत महत्वपूर्ण है।
इस बैठक में विशेष रूप से भारत सरकार द्वारा पूर्ण वित्त पोषित फिलिस्तीनी इंस्टीट्यूट ऑफ डिप्लोमेसी की प्रगति और सुषमा स्वराज फॉरेन सर्विस इंस्टीट्यूट के साथ होने वाले अपेक्षित सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों पक्षों ने इन कड़े संस्थानों की क्षमता बढ़ाने पर प्रतिबद्धता जताई।
फिलिस्तीन ने शिक्षा और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों, छात्रवृत्तियों तथा विभिन्न संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों को भारत की ओर से दिए जा रहे नियमित योगदान की सराहना की। दोनों देशों ने अपनी कूटनीतिक दोस्ती को दोहराते हुए करीबी संबंधों को कड़ाई से और आगे बढ़ाने के लिए आपसी सहयोग जारी रखने का वादा किया।
दोनों कड़े प्रतिनिधियों ने दोहराया कि गाजा में जारी गंभीर मानवीय संकट का केवल शांतिपूर्ण राजनीतिक समाधान ही इस क्षेत्र को स्थिरता दे सकता है। भारत आने वाले समय में भी फिलिस्तीनी संस्थानों को हर संभव सहयोग देने और कड़े राहत अभियानों में कूटनीतिक योगदान जारी रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।