पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून का दुरुपयोग (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून का खौफ: झूठे मामलों और वसूली गिरोहों से उजड़ रहे हैं सैकड़ों निर्दोष परिवार

Blasphemy Law Abuse: पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग से 450 से अधिक लोग झूठे मामलों में फंसे हैं। वसूली गिरोहों और FIA अधिकारियों की मिलीभगत से परिवारों में डर का माहौल है, कई मौतें हुई हैं।

प्रिया सिंह

Blasphemy law extortion gangs Pakistan: पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों के बढ़ते दुरुपयोग ने मानवाधिकारों की स्थिति को अत्यंत चिंताजनक बना दिया है जहां सैकड़ों परिवार अब निरंतर डर के साए में जीने को मजबूर हैं। हालिया रिपोर्टों से खुलासा हुआ है कि संगठित अपराधी गिरोह व्यक्तिगत रंजिश और जबरन वसूली के लिए निर्दोष लोगों को इन कठोर कानूनों के जाल में फंसा रहे हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आंकड़ों ने इस भयावह सच्चाई पर मुहर लगाई है कि किस तरह झूठे आरोपों के कारण कई जिंदगियां सलाखों के पीछे दम तोड़ रही हैं। इस संकट ने न केवल अल्पसंख्यकों बल्कि बहुसंख्यक समुदाय के युवाओं के भविष्य पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

खतरनाक वसूली गिरोह

पाकिस्तान में 'ईशनिंदा गैंग' के नाम से चर्चित सिंडिकेट अब सक्रिय रूप से लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। ये गिरोह पहले लोगों से भारी पैसे की मांग करते हैं और मांग पूरी न होने पर उन पर ईशनिंदा का झूठा आरोप मढ़ देते हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अनुसार अब तक 450 से अधिक लोग ऐसे मामलों में फंस चुके हैं जिनमें अधिकांश पुरुष और अल्पसंख्यक शामिल हैं।

न्यायिक प्रक्रिया में बाधा

जुलाई में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने 101 प्रभावित परिवारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए संघीय सरकार को एक विशेष जांच आयोग गठित करने का निर्देश दिया था। दुर्भाग्यवश एक अपीलीय पीठ ने बाद में अंतरिम आदेश के जरिए इस महत्वपूर्ण जांच प्रक्रिया को ही निलंबित कर दिया जिससे पीड़ितों की उम्मीदों को गहरा धक्का लगा है। न्यायिक देरी और कानूनी पेचीदगियों के कारण निर्दोष लोग बिना किसी ठोस सबूत के वर्षों तक जेलों में सड़ने को मजबूर हैं।

जांच एजेंसियों की भूमिका

यूसीए न्यूज की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला दावा किया गया है कि पाकिस्तान की प्रमुख जांच एजेंसी एफआईए के साइबर क्राइम विंग के कुछ अधिकारी भी इन साजिशों में शामिल हैं। कई मामलों में यह पाया गया है कि सरकारी अधिकारी स्वयं झूठे सबूत और डिजिटल आरोप गढ़ने में इन आपराधिक गिरोहों की मदद कर रहे हैं। इससे कानून व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास पूरी तरह डगमगा गया है और भ्रष्टाचार की जड़ें और गहरी हो गई हैं।

आमिर शहजाद की आपबीती

लाहौर के 33 वर्षीय रिक्शा चालक आमिर शहजाद का मामला इस कानून के दुरुपयोग का एक ज्वलंत उदाहरण बनकर उभरा है। एक पार्सल लेने के बहाने घर से निकले शहजाद को एफआईए ने फेसबुक पर कथित ईशनिंदात्मक पोस्ट साझा करने के आरोप में अचानक गिरफ्तार कर लिया था। शहजाद के परिवार का कहना है कि वह उस सिंडिकेट का शिकार हुआ है जो निर्दोष युवाओं को फंसाकर उनसे पैसे ऐंठने का काम करता है।

जेलों में बढ़ती मौतें

रिपोर्ट के मुताबिक ईशनिंदा के आरोपी 10 ईसाइयों में से कम से कम पांच लोगों की हिरासत के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। जेलों के भीतर अन्य कैदी और कर्मचारी भी इन आरोपियों के साथ अमानवीय व्यवहार करते हैं जिससे उनकी सुरक्षा हमेशा खतरे में बनी रहती है। मानवाधिकार संगठनों ने सरकार से मांग की है कि हिरासत में होने वाली इन मौतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों को सजा दी जाए।

क्या नेपाल, भूटान या पाकिस्तान के नागरिक दे सकते हैं UPSC सिविल सेवा परीक्षा? जानिए पूरा नियम

गुजरात और महाराष्ट्र में PM मोदी का Gen Z से सीधा संवाद, वडोदरा में Y-आकार के रैंप पर युवाओं से करेंगे बातचीत

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को जान से मारने की धमकी, मंत्रालय कार्यालय पहुंची गुमनाम चिट्ठी से मचा हड़कंप

Delhi Building Collapse Live: PG मालिक के बाद पत्नी-बेटा भी अरेस्ट, सत्य निकेतन में 27 घंटे बाद रेस्क्यू खत्म

फिरोज गांधी: नेहरू परिवार के सदस्य नहीं, आज़ाद भारत के पहले बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश करने वाले सांसद