पाकिस्तानी सेना प्रमुख असिम मुनीर (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

बलूचिस्तान में खुफिया तंत्र की बड़ी नाकामी, BLA के 'ऑपरेशन हेरोफ' से दहल उठी पाकिस्तानी सेना

Intelligence Failure Pakistan: बलूचिस्तान में BLA के 'ऑपरेशन हेरोफ 2.0' ने पाक सेना और ISI की बड़ी खुफिया नाकामी उजागर हुई। हमले के दौरान आम लोगों का विद्रोही लड़ाकों को खुला समर्थन देखा गया है।

प्रिया सिंह

Major Intelligence Failure In Balochistan: बलूचिस्तान में हाल ही में बड़ी खुफिया विफलता पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यूरेशिया रिव्यू की ताजा रिपोर्ट के अनुसार बलूच लिबरेशन आर्मी ने 'ऑपरेशन हेरोफ 2.0' के जरिए पाकिस्तानी सेना के मजबूत किलों को एक साथ निशाना बनाया है। यह भीषण हमला केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी बल्कि दुनिया की सबसे बेहतरीन जासूसी एजेंसी होने का दावा करने वाली BLA को ट्रैक करने में ISI की नाकामी की पोल खोलता है। BLA के लड़ाकों ने राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सेना के बुनियादी ढांचे को नौ अलग-अलग जिलों में एक साथ चुनौती देकर तबाही मचाई है।

खुफिया तंत्र की पोल

रिटायर्ड भारतीय सेना अधिकारी निलेश कुंवर के अनुसार सैकड़ों लड़ाकों के इतने बड़े अभियान के लिए व्यापक समन्वय और भारी आवाजाही की जरूरत होती है। इलेक्ट्रॉनिक संचार और BLA कैडरों के बड़े पैमाने पर एकत्रीकरण के बावजूद पाकिस्तानी सेना और ISI इस हलचल को पहचानने में पूरी तरह से नाकाम रहे। यह नाकामी उस समय और भी बड़ी हो जाती है जब पाकिस्तानी जनरलों ने पहले ही आतंकियों को करारा जवाब देने का सार्वजनिक वादा किया था।

आम जनता का समर्थन

क्षेत्र से सामने आए वीडियो और दृश्यों में आम बलूच नागरिकों को BLA लड़ाकों के साथ खुले तौर पर मिलते-जुलते और उनका साथ देते देखा गया है। यह दृश्य पाकिस्तानी सेना के उस पुराने दावे को सीधे चुनौती देते हैं जिसमें कहा जाता था कि बलूच सशस्त्र समूह केवल स्थानीय लोगों को डराते हैं। हकीकत यह है कि आबादी वाले इलाकों पर नियंत्रण करने के दौरान स्थानीय लोगों ने इन लड़ाकों का विरोध करने के बजाय उनके प्रति सहानुभूति दिखाई है।

महिला लड़ाकों की भूमिका

ऑपरेशन हेरोफ 2.0 की सबसे खास बात इसमें महिला बलूच लड़ाकों की सक्रिय भागीदारी और उनकी मौत को गले लगाने की दृढ़ इच्छाशक्ति रही है। BLA ने अपनी पारंपरिक ‘हिट एंड रन’ रणनीति को बदलते हुए अब महत्वपूर्ण इलाकों पर लंबे समय तक नियंत्रण करने और अंत तक लड़ने का फैसला किया। इस नई रणनीति ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है और उनकी जवाबी कार्रवाई की क्षमता को पूरी दुनिया के सामने उजागर किया है।

सैन्य नेतृत्व की चुप्पी

पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा ISPR इस बड़ी विफलता को “सुरक्षा बलों की जीत” बताकर पेश करने की नाकाम कोशिश कर रही है जो बेहद हास्यास्पद है। जनरल आसिम मुनीर की इस गंभीर सुरक्षा चूक पर चुप्पी यह संकेत देती है कि पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के पास इन कठिन सवालों का कोई जवाब नहीं है। अगर पाकिस्तान का आरोप है कि इन समूहों को विदेशी समर्थन प्राप्त है तो उसकी खुफिया एजेंसियां इस कथित कड़ी को आज तक क्यों नहीं तोड़ पाई हैं।

बलूचिस्तान में अशांति

नौ जिलों में एक साथ शुरू हुए इस विद्रोह ने यह साफ कर दिया है कि बलूचिस्तान में अब स्थिति पाकिस्तानी सेना के नियंत्रण से बाहर निकलती जा रही है। पाकिस्तानी नेतृत्व को अब यह स्वीकार करना होगा कि बंदूकों के दम पर बलूच लोगों की आवाज को दबाना अब उनके लिए संभव नहीं रह गया है। यह खुफिया विफलता न केवल मुनीर के कार्यकाल पर दाग है बल्कि यह पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा की जर्जर हालत का सबसे नया और बड़ा प्रमाण है।

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