ईरान की अमेरिका को खुली चेतावनी, फिर हमला हुआ तो हिंद महासागर तक पहुंचेगा युद्ध; भारत पर कितना पड़ेगा असर?

America Iran War: पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान पर टिकी हुई है। दोनों देशों के बीच जारी जंग अब हिंद महासागर तक फैलने की आशंका बढ़ गई है। इस युद्ध का भारत पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
ईरान अमेरिका युद्ध
डोनाल्ड ट्रंप, मोजतबा ख़ामेनेईसोर्स (सोशल मीडिया)
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Impact of the US-Iran War on India: पश्चिम एशिया में जारी अवरोध और टकराव का प्रभाव पूरे दुनिया पर पड़ा है। फरवरी 2026 से ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी जंग अब अमेरिका के लिए गले की फांस बना हुआ है। टकराव शुरू होने पर अमेरिका को लगा था कि यह युद्ध कुछ हफ्तों में खत्म कर ईरान की सत्ता को बदल देंगे, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप और उनकी सेना पिछले 7 महीनों से तेहरान की इस्लामिक सत्ता के खिलाफ युद्ध लड़ रही है।

अब ईरान अपने सबसे बड़े डर (अमेरिका के हमले) का सामना कर चुका है। ईरान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहा है। तेहरान की तरफ से साफ और सख्त लहजे में कहा गया है कि अब अगर अमेरिका हमला करता है, तो वह इस युद्ध को हिंद महासागर या उससे आगे भी फैलाने के मूड में नजर आ रहा है। मतलब साफ है कि अब अगले हमले की स्थिति में हिंद महासागर के बाहर स्थित अमेरिका के ठिकाने भी ईरान के निशाने पर होंगे।

ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी से बात करते हुए सुप्रीम लीडर खामेनेई के मुख्य सलाहकार रहीम सफवी ने युद्ध को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने साफ कहा, "यह संघर्ष फारस की खाड़ी से लेकर होर्मुज और लाल सागर तक फैल गया है। ऐसे में संभव है कि अब अगर अमेरिका की तरफ से किसी भी तरह का हमला किया गया, तो यह लड़ाई हिंद महासागर या उससे भी आगे बढ़ सकती है।" 

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पड़ोसी देशों को ईरान की चेतावनी

ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा के सचिव मोहसेन रेजाई ने पड़ोसी देशों को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि आप हमारी उड़ानों पर प्रतिबंध लगाते हैं और अमेरिका के साथ सहयोग करते हैं, तो आपके हवाई अड्डों पर कोई उड़ान नहीं होगी। यदि आप अमेरिका का साथ देते हैं, तो हम चुपचाप यह सब नहीं देखते रहेंगे।

अमेरिका डुबा चूका है ईरान का युद्धपोत

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को हिंद महासागर तक फैलने का खतरा बड़ा है। मार्च 2026 में अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने दक्षिण श्रीलंका के पास हिंद महासागर में ईरान के युद्धपोत IRIS डेना (IRIS Dena) को टॉरपीडो से हमला करके डुबो दिया था। जो कि फिलहाल भारत के कोच्चि बंदरगाह पर खड़ा हुआ है।

चरम पर है ईरान और अमेरिका का तनाव

गौरतलब है कि ईरान की तरफ से युद्ध को हिंद महासागर और उससे भी आगे बढ़ाने का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर है। लाल सागर के बाब अल मंडेब पर हूती विद्रोहियों ने निशाना साध रखा है।

वहीं दूसरी तरफ होर्मुज पर ईरानी सेना ने पाबंदी लगाई हुई है। ईरान की तरफ से बार-बार यह कहा जा रहा है कि अगर अमेरिका की तरफ से कोई बड़ा हमला होता है। तो अब युद्ध हिंद महासागर या उससे भी आगे फैल सकता है। जानकारी के लिए बता दें अमेरिका ने होर्मुज पर बाहर से नाके बंदी लगाई हुई है। उसका युद्धपोत फिलहाल अरब सागर में ही मौजूद है।

भारत के लिए क्या है, चिंता?

ईरान और अमेरिका का यह युद्ध का प्रभाव पूरी दुनिया पर है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। अगर यह हिंद महासागर तक फैलता है तो यह भारत के लिए भी परेशानी खड़ी कर देगा। दुनिया के पांच महासागरों में से तीसरे नंबर पर आने वाला हिंद महासागर मौजूदा समय में पहले से ही चिंता का कारण बना हुआ है। बाब अल-मंदेब और होर्मजु पर यु्द्ध हो रहा है। जानकारी के मुताबिक होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या पिछले सप्ताह केवल 17 रही। यह अपने आप में एक परेशानी पैदा करने वाली बात है।

ऊर्जा के संकट से महंगाई बढ़ने की चिंता

युद्ध से पहले भारत अपनी खपत का करीब 40 फीसदी ईंधन की आपूर्ति के लिए आयात होर्मुज जलडमरू मध्य से करता था। टकराव के बाद से ही यह मार्ग बंद है। भारत अन्य मार्ग से ईंधन का आयात कर रहा है। आयात के खर्चे बढ़ने से ईंधन के दाम और आपूर्ति का प्रभावित होना स्वाभाविक है ऐसे में सरकार को महंगाई से उभरने की एक नई चुनौती पैदा होगी।

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