Pakistan Army Hostage Crisis: पाकिस्तान ने एक बार फिर अपने ही वर्दीधारियों के साथ विश्वासघात किया है। बलूचिस्तान में सक्रिय उग्रवादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) द्वारा बंधक बनाए गए सात पाकिस्तानी सैनिकों के अस्तित्व को ही पाकिस्तानी सेना ने सिरे से नकार दिया है। इस घटनाक्रम ने न केवल पाकिस्तान की सैन्य पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि मुसीबत में फंसे अपने ही जवानों को लावारिस छोड़ देना पाकिस्तानी सेना की एक पुरानी रणनीति रही है।
पूरा मामला 14 फरवरी को शुरू हुआ जब BLA ने तस्वीरें और वीडियो जारी कर दावा किया कि उसने पाकिस्तानी सेना के सात जवानों को अपने कब्जे में ले लिया है। संगठन ने इस्लामाबाद को सीधा अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि 21 फरवरी तक उनके साथियों को नहीं छोड़ा गया तो इन सात सैनिकों को मार दिया जाएगा। वीडियो सामने आते ही पाकिस्तानी सेना की दसवीं कोर और ISPR से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल्स सक्रिय हो गए। उन्होंने इन वीडियो को 'डिजिटल छेड़छाड़' और 'फर्जी' बताते हुए दावा किया कि ये लोग पाकिस्तानी सैनिक नहीं हैं।
पाकिस्तानी सेना के दावों की पोल तब खुल गई जब बंधक जवानों का एक नया वीडियो सामने आया। इस वीडियो में सात लोग एक साथ बैठे दिख रहे हैं और अपने-अपने आर्मी सर्विस कार्ड कैमरे पर दिखा रहे हैं। सिपाही मोहम्मद शाहराम नामक एक जवान भावुक होकर अपना सैन्य पहचान पत्र और नेशनल आईडी कार्ड दिखाते हुए पूछ रहा है, 'अगर ये असली नहीं हैं तो इन्हें जारी किसने किया?'। शाहराम ने बताया कि वह अपने परिवार का सबसे बड़ा बेटा है और उसके दिव्यांग पिता समेत पूरा परिवार उसी पर निर्भर है। इसके अलावा, जवान दीदार उल्लाह और उस्मान ने भी अपने दस्तावेज दिखाकर खुद को सेवारत सैनिक बताया है।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान का यह रवैया 1999 के कारगिल युद्ध की याद दिलाता है। उस समय भी पाकिस्तान ने अपने नियमित सैनिकों की मौजूदगी से इनकार किया था लेकिन बाद में जब युद्धक्षेत्र से शव और प्रमाण मिले तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी। वर्तमान में जनरल आसिम मुनीर के नेतृत्व वाली सेना भी वही 'इन्फॉर्मेशन वॉर' वाली रणनीति अपना रही है पहले नैरेटिव को चुनौती दो फिर जनमत को मैनेज करो और अंत में संस्थागत जवाबदेही से पल्ला झाड़ लो।
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जैसे-जैसे 21 फरवरी की डेडलाइन करीब आ रही है, इन जवानों की जान पर खतरा बढ़ता जा रहा है,। पाकिस्तान सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान नहीं आया है जिससे अटकलों को और बल मिल रहा है। सवाल यह है कि यदि वे सैनिक नहीं हैं तो उनके पास सेना के असली दस्तावेज कैसे आए? यह संकट अब केवल बंधक संकट नहीं रहा बल्कि पाकिस्तानी सैन्य संस्था की विश्वसनीयता और अपने जवानों के प्रति उसकी नैतिकता की कड़ी परीक्षा बन गया है।