Pakistan Airstrikes Afghanistan Taliban Tension: अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हवाई हमलों से दोनों देशों में तनाव बढ़ गया है। पाकिस्तानी सेना ने कुनार व हेलमंद प्रांतों में नागरिकों के घरों को निशाना बनाकर भीषण बमबारी की।
तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद अनुसार हमलों में महिलाओं व बच्चों सहित 9 नागरिकों की मौत हुई तथा 11 घायल हुए। इससे पूर्व 24 सितंबर को कंधार, खोस्त व पक्तिया में पाकिस्तान ने सिलसिलेवार हवाई व ड्रोन हमले किए थे।
तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा के प्रमुख आधार कंधार पर हुए हमलों से अफगान नागरिकों में रोष है। काबुल में खोया राजनीतिक व रणनीतिक प्रभाव दोबारा पाने की इस्लामाबाद की कोशिश पर सवाल उठ रहे हैं।
पाकिस्तानी सेना द्वारा गुरुवार तड़के अफगानिस्तान के कुनार व हेलमंद प्रांतों में हवाई हमले किए गए। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद अनुसार हमलों में महिलाओं व बच्चों समेत 9 नागरिकों की मौत हुई।
घटना में 11 लोग घायल हुए तथा नागरिकों के तीन घर पूरी तरह तबाह हो गए। 21 सितंबर को कुनार व पक्तिका में हुए हमलों में एक पुरुष, महिला व बच्ची की मौत हुई थी। पाकिस्तान ने दावा किया था कि 21 सितंबर की कार्रवाई में 28 आतंकवादी मारे गए।
हालांकि संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) ने आम नागरिकों के हताहत होने की पुष्टि की। मौतों के विरोध में काबुल सहित कई अफगान शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। 24 सितंबर को कंधार, खोस्त व पक्तिया समेत 10 स्थानों पर हवाई हमले हुए थे।
इस सैन्य कार्रवाई के पीछे खैबर पख्तूनख्वा के कोहाट की घटना को वजह बताया गया। 18 सितंबर को विस्फोटकों से भरे वाहन से कोहाट पुलिस परिसर पर हमला हुआ था। आतंकवादियों के हमले में कम से कम 16 पुलिसकर्मी मारे गए थे।
इस घातक हमले की जिम्मेदारी आईएमपी (IMP) संगठन ने ली थी। आईएमपी हाफिज गुल बहादर समूह का गुट है जिसके टीटीपी से संबंध हैं। पाकिस्तानी दावों अनुसार पुलिस परिसर पर एक हमलावर अफगान नागरिक था।
अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 बीच पाकिस्तान ने 15 बार हवाई हमले किए। अनुमानों अनुसार इस साल सीमा पार हिंसा में 1100 से अधिक नागरिक प्रभावित हुए।
मई में काबुल के नशा मुक्ति केंद्र पर हमले में 269 लोगों की मौत पर जांच की मांग उठी थी। विश्लेषकों अनुसार टीटीपी को रोकने अलावा पाकिस्तान का लक्ष्य काबुल में खोया प्रभाव पाना है।
कभी पाकिस्तान का सहयोगी रहा तालिबान अब उसके लिए बड़ी सुरक्षा चुनौती बन चुका है। इस्लामाबाद प्रतिरोधी गुटों को समर्थन देकर काबुल पर सैन्य दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है। पाकिस्तान का उद्देश्य अफगानिस्तान को कमजोर व खुद पर निर्भर राज्य बनाए रखना रहा है।
'द डिप्लोमैट' की रिपोर्ट अनुसार यह रणनीति उल्टा असर डालने वाली साबित हो रही है। तालिबान ने पाकिस्तान से ही दबाव बनाने व रणनीतिक परिसंपत्तियां विकसित करने की कला सीखी है। अमेरिकी हस्तक्षेप की सीख दर्शाती है कि बमबारी से तालिबान को झुकाने में दूरदर्शिता की कमी है।