पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

अफगान सीमा पर तनाव से पाकिस्तान में आतंकी हमलों की बाढ़, 2025 में हिंसा ने ली 3100 से ज्यादा जानें

Afghan Border Clashes: अफगान सीमा पर झड़पों के बीच पाकिस्तान में आतंकी हमलों में 25% की वृद्धि हुई है। 2025 में अब तक 3,187 लोग मारे गए हैं, जिससे पाकिस्तान की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर खतरा है।

प्रिया सिंह

Surge In Pakistan Terror Attacks 2025: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद ने अब पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, सीमा पर बढ़ती झड़पों के कारण पाकिस्तान के भीतर आत्मघाती हमलों और सुरक्षा बलों पर हमलों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। वर्ष 2025 के शुरुआती 11 महीनों में आतंकी हिंसा के कारण मरने वालों का आंकड़ा 3,187 तक पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 25 प्रतिशत अधिक है। इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि तालिबान के साथ बढ़ता तनाव पाकिस्तान के लिए सैन्य और आर्थिक दोनों मोर्चों पर भारी पड़ रहा है।

आतंकी हिंसा में भारी उछाल

सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान ने पिछले एक दशक की सबसे भीषण आतंकी हिंसा देखी है। हमलों में न केवल 3,187 लोगों की जान गई, बल्कि 1,981 लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान के साथ सीमा पर जारी तनाव ने घरेलू आतंकी समूहों को और अधिक सक्रिय होने का मौका दे दिया है।

सैन्य खर्च और आर्थिक बोझ

यूरोपियन टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि अफगानिस्तान के साथ संघर्ष के कारण पाकिस्तान का रक्षा बजट तेजी से बढ़ रहा है। वित्त मंत्रालय ने सीमाओं पर बढ़ते तनाव को देखते हुए नई रक्षा खरीद के लिए अतिरिक्त फंड को मंजूरी दी है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आईएमएफ के सहारे चल रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए यह सैन्य टकराव विनाशकारी साबित हो सकता है।

टीटीपी और तालिबान का रुख

इस्लामाबाद ने अपने देश में हो रहे हमलों के लिए टीटीपी और तालिबान समर्थित संगठनों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। इसके विपरीत, काबुल ने इन आरोपों को गलत बताया है और पाकिस्तान पर ही इस्लामिक स्टेट जैसे समूहों को पनाह देने का आरोप लगाया है। टीटीपी की बढ़ती गतिविधियों ने पाकिस्तान की सेना को हताशा में अफगान सीमा के भीतर हवाई हमले करने पर मजबूर किया है।

सीमा पर सैनिकों का नुकसान

तालिबान की गुरिल्ला रणनीति पाकिस्तानी सेना के लिए बड़ी चुनौती बन गई है और दिसंबर के मध्य तक गोलीबारी में कम से कम 44 पाकिस्तानी सैनिक मारे जा चुके हैं। पूर्व राजनयिकों ने सलाह दी है कि इतिहास से सबक लेते हुए पाकिस्तान को अफगानिस्तान की धरती पर किसी भी लंबी जमीनी कार्रवाई से बचना चाहिए। यह संघर्ष पाकिस्तान के संसाधनों को विकास के बजाय युद्ध की आग में झोंक रहा है।

भू-राजनीतिक अस्थिरता का खतरा

दक्षिण एशियाई विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान इस समय एक बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ा है जहां महंगाई और गिरती मुद्रा ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। कोई भी लंबा सैन्य टकराव देश की आर्थिक सुधार प्रक्रिया को पूरी तरह पटरी से उतार सकता है। सुरक्षा बलों पर बढ़ते हमले और अफगानिस्तान के साथ कड़वाहट पाकिस्तान को वैश्विक पटल पर और अधिक अलग-थलग कर सकती है।

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