ट्रंप को इस साल नोबेल पुरस्कार मिलना मुश्किल (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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ट्रंप नहीं...पुतिन के 'जानी दुश्मन' को मिलेगा शांति का नोबेल? लोकतंत्र को बचाने के लिए दे दी थी जान

Nobel Prize 2025: डोनाल्ड ट्रंप शांति नोबेल पुरस्कार की दौड़ में हैं, लेकिन इजरायल-गाजा युद्ध जैसी जटिलताओं के कारण विशेषज्ञ उन्हें इस साल का विजेता मानने से कतरा रहे हैं। निर्णय 10 अक्टूबर को होगा।

अक्षय साहू

Nobel Prize: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नोबेल पुरस्कार पाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि 10 अक्टूबर को होने वाले ऐलान में ट्रंप के हाथ निराशा लग सकती है। भले ही वो सात महीने में सात युद्ध रुकवाने का दावा ही क्यों न करें। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर ट्रंप नहीं, तो फिर किसे 2025 का शांति नोबेल पुरस्कार मिल सकता है।

नॉर्वेजियन नोबेल समिति इस शुक्रवार को शांति नोबेल पुरस्कार विजेता के नाम का ऐलान करने वाली है। इसे लेकर महीनों से अटकलें लगाई जा रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई अंतरराष्ट्रीय मंचों से खुद को इसका हकदार बता चुके हैं। हालांकि, नोबेल पुरस्कार देने वाली संस्थाओं की राय इससे बिलकुल अलग है।

गाजा युद्ध पर अटकी बात

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के पुरस्कार जीतने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा इज़रायल-गाजा युद्ध है। अगर ट्रंप इसे सुलझा लेते हैं, फिर भी कई ऐसी चीजें हैं जिन्हें किए बिना ट्रंप को नोबेल नहीं दिया जा सकता है। खासकर गाजा में रहने वाले लाखों लोगों की जिंदगियों से जुड़े मामलों पर, जिनमें अभी और समय लग सकता है। लेकिन शायद उनका नाम अगले साल हो।

ओस्लो स्थित शांति अनुसंधान संस्थान की अध्यक्ष नीना ग्रेगर ने कहा कि ट्रंप की नीतियों को नोबेल पुरस्कार के मूल आदर्शों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा, गाजा में शांति लाने के प्रयासों के बावजूद, हमने ऐसी कई नीतियां भी देखी हैं जो अल्फ्रेड नोबेल की मूल भावनाओं के विपरीत हैं, विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय सहयोग और देशों के बीच भाईचारे को लेकर।

तीन नामों पर चर्चा तेज

2025 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार के लिए 338 लोगों को नामित किया गया है। हालांकि, इसमें से केवल तीन नामों को लेकर चर्चा तेज है। इसमें पहला नाम है सूडान आपातकालीन प्रतिक्रिया कक्ष (ERRs) का। यह जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों का नेटवर्क है, जिसने युद्ध से ग्रस्त सूडान के सुदूर इलाकों में जाकर लोगों की मदद की।

इसके अलावा, दूसरा नाम है लोकतांत्रिक संस्थाओं और मानवाधिकारों का कार्यालय (OSCE), जो यूरोप की सुरक्षा और सहयोग संगठन का एक अहम अंग है। यह संस्था यूरोपीय देशों में लोकतंत्र, कानून के शासन और मानवाधिकारों को मजबूत करने के लिए कार्य करती है।

यूलिया नवलनाया के नाम पर चर्चा

नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में यूलिया नवलनाया का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। यूलिया, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कट्टर विरोधी और विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी की पत्नी हैं। एलेक्सी नवलनी की 2024 में जेल में मौत हो गई थी, जहां वह सजा काट रहे थे। यूलिया नवलनाया का आरोप है कि उनके पति की हत्या के पीछे राष्ट्रपति पुतिन का हाथ है। तब से वह लगातार पुतिन के खिलाफ आवाज उठा रही हैं एक ऐसा साहसी कदम, जो रूस में रहकर करना बेहद मुश्किल है।

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