किम जोंग-उन (सोर्स- सोशल मीडिया)
विदेश

उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों का खौफनाक असर, जगा 2000 साल से सो रहा अर्थक्वेक जोन, आए 1399 झटके

North Korea Earthquake: उत्तर कोरिया द्वारा मंताप पहाड़ी क्षेत्र में कराए गए परमाणु परीक्षणों के कारण 2000 साल से शांत पड़ा सीस्मिक जोन एक्टिव हो गया है, जहां अब तक कुल 1399 झटके आ चुके हैं।

प्रिया सिंह

North Korea Earthquake Seismic Zone: उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन द्वारा कराए गए बार बार परमाणु परीक्षणों से बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है। मंताप पहाड़ी इलाके में स्थित भूमिगत परमाणु परीक्षण केंद्र के कारण वहां सीस्मिक गतिविधियां तेजी से बढ़ने लगी हैं।

पिछले 2000 सालों से शांत पड़ा यह भूकंपीय क्षेत्र अब एक बार फिर लगातार आ रहे झटकों का केंद्र बन गया है। वर्ष 2008 से 2025 के बीच इस क्षेत्र में 1399 झटके दर्ज किए गए हैं, जिससे भूवैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है।

मंताप पहाड़ियों में 1399 झटकों से बढ़ी चिंता

उत्तर कोरिया के मंताप पहाड़ी क्षेत्र में स्थित भूमिगत परमाणु परीक्षण केंद्र लंबे समय से वैज्ञानिकों की निगरानी में रहा है। इसी इलाके में किए गए कई परमाणु परीक्षणों के बाद यहां की जमीन के भीतर होने वाली भूकंपीय गतिविधियों में बदलाव देखने को मिला है।

नवीनतम वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2008 से 2025 के बीच मंताप पहाड़ियों के आसपास कुल 1399 भूकंपीय झटके दर्ज किए गए। खास बात यह है कि अध्ययन में इस क्षेत्र को करीब 2000 साल तक अपेक्षाकृत शांत रहने वाला सीस्मिक जोन बताया गया है।

2006 से 2017 के बीच हुए 6 परमाणु परीक्षण

उत्तर कोरिया ने वर्ष 2006 से 2017 के बीच मंताप इलाके में कम से कम छह भूमिगत परमाणु परीक्षण किए। इन परीक्षणों के बाद इस क्षेत्र की भूकंपीय गतिविधियों को लेकर वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ी।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2013 से पहले इस इलाके में किसी बड़े भूकंप की जानकारी नहीं थी। 2013 में उत्तर कोरिया के तीसरे परमाणु परीक्षण के बाद यहां पहला बड़ा भूकंप दर्ज किया गया। इसके बाद वर्ष 2017 में देश ने अपना छठा और सबसे शक्तिशाली परमाणु परीक्षण किया।

2017 के परीक्षण के तुरंत बाद मंताप क्षेत्र में 6.3 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। इसके बाद भी इस इलाके में लगातार छोटे-छोटे झटके दर्ज किए जाते रहे।

ज्यादातर भूकंप 2 से 3 तीव्रता के

वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्ष 2017 के बाद दर्ज किए गए अधिकांश भूकंप बहुत ज्यादा शक्तिशाली नहीं थे। इनकी तीव्रता मुख्य रूप से रिक्टर पैमाने पर 2 से 3 के बीच रही।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि इन भूकंपों के केंद्र धरती के बहुत अधिक नीचे नहीं थे। कम गहराई पर आने वाले इन झटकों ने वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित किया, क्योंकि इनका समय और स्थान परमाणु परीक्षणों से जुड़ी गतिविधियों के आसपास पाया गया।

हालांकि, हर भूकंपीय घटना को सीधे परमाणु परीक्षण से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से अलग-अलग जांच का विषय है। प्राकृतिक और मानव निर्मित गतिविधियों के बीच संबंध निर्धारित करने के लिए भूकंप की गहराई, स्थिति और समय जैसे कई पहलुओं का अध्ययन किया जाता है।

क्या 2000 साल पुराना फॉल्ट फिर हुआ एक्टिव?

रिसर्चर्स के मुताबिक, इस क्षेत्र के पुराने भूकंपीय रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि करीब 2000 साल पहले मंताप के आसपास प्राकृतिक भूकंपीय गतिविधियां होती थीं। बाद में यह इलाका लंबे समय तक शांत रहा।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि परमाणु परीक्षणों से पैदा हुए शक्तिशाली विस्फोटों ने जमीन के भीतर मौजूद चट्टानों और फॉल्ट सिस्टम पर दबाव डाला। इसके बाद क्षेत्र में छोटे भूकंपों की संख्या बढ़ी।

वर्ष 2017 के बाद मंताप पहाड़ियों के आसपास लगातार दर्ज हो रहे झटकों ने इस सवाल को फिर से सामने ला दिया है कि क्या मानव निर्मित परमाणु विस्फोट किसी लंबे समय से शांत सीस्मिक क्षेत्र को दोबारा एक्टिव कर सकते हैं। वैज्ञानिक इसी संभावित संबंध को समझने के लिए क्षेत्र की भूकंपीय गतिविधियों का अध्ययन कर रहे हैं।

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