जापान परमाणु पनडुब्बी सोर्स- IANS
विदेश

US दक्षिण कोरिया-जापान को परमाणु पनडुब्बियों के लिए उकसा रहा, उत्तर कोरिया का आरोप

North Korea US Tensions: उत्तर कोरिया ने अमेरिका पर दक्षिण कोरिया और जापान को परमाणु पनडुब्बियां हासिल करने के लिए उकसाने का आरोप लगाया और AUKUS को क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला बताया।

करुणा नंद शाहवाल

Pyongyang KCNA Statement: उत्तर कोरिया ने अमेरिका पर दक्षिण कोरिया और जापान को परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां हासिल करने के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। प्योंगयांग का दावा है कि वाशिंगटन अपने सहयोगी देशों तक सैन्य परमाणु तकनीक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव और परमाणु प्रसार का खतरा बढ़ सकता है।

उत्तर कोरिया की यह प्रतिक्रिया उस समय आई जब अमेरिकी नौसेना के एक अधिकारी ने पिछले गुरुवार को हवाई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दक्षिण कोरिया और जापान की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां हासिल करने की योजनाओं पर टिप्पणी की थी।

जापान को लेकर अमेरिका पर बड़ा आरोप

योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने कहा था कि दक्षिण कोरिया को ऐसी पनडुब्बियों की जरूरत के लिए स्पष्ट सैन्य और रणनीतिक कारण बताने चाहिए,

न कि उन्हें सिर्फ एक 'प्रतिष्ठा के प्रतीक' के रूप में देखना चाहिए। वहीं, उन्होंने जापान की इस दिशा में कोशिशों को अपेक्षाकृत अधिक सकारात्मक नजरिए से देखा।

अमेरिका परमाणु प्रसार सबसे बड़ा सुत्रधार

उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए (केसीएनए) में प्रकाशित एक टिप्पणी में अंतरराष्ट्रीय मामलों के एक विश्लेषक ने दावा किया कि यह चर्चा दक्षिण कोरिया और जापान को परमाणु पनडुब्बियां हासिल करने के लिए 'उकसाने' की कोशिश थी। उन्होंने अमेरिका को 'दुनिया में परमाणु प्रसार का सबसे बड़ा सूत्रधार' बताया।

एशिया-प्रशांत में बढ़ते सामरिक तनाव पर चिंता

विश्लेषक ने आरोप लगाया कि अमेरिका 'ऑकस' सुरक्षा साझेदारी के जरिए अपने सहयोगी देशों, जैसे दक्षिण कोरिया और जापान, तक परमाणु पनडुब्बी तकनीक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने लिखा, "हकीकत यह दिखाती है कि अमेरिका की 'ऑकस 2.0' योजना, जिसके तहत गैर-परमाणु सहयोगी देशों को सैन्य उपयोग की परमाणु तकनीक देने की बात है, अब बड़े पैमाने पर विस्तार के चरण में पहुंच चुकी है।"

'ऑकस' एक सुरक्षा साझेदारी है जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इसकी घोषणा 2021 में हुई थी और 2024 में इस पर हस्ताक्षर किए गए।

इस समझौते ने ऑस्ट्रेलिया के लिए अमेरिकी तकनीक की मदद से परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां हासिल करने का रास्ता खोला। कई विशेषज्ञ इसे दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच भविष्य में होने वाले किसी संभावित समझौते के लिए एक मॉडल के रूप में भी देखते हैं।

परमाणु प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के दिए निर्देश

उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया और जापान की ओर से परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां हासिल करने की कोशिशों को 'लापरवाह कदम' बताया।

उसका कहना है कि इससे यह साफ दिखता है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपने प्रतिद्वंद्वी देशों को रोकने के लिए अमेरिका अपने सहयोगियों को एक तरह की अग्रिम सैन्य ताकत के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

विश्लेषक ने इसे वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था के लिए खतरा बताते हुए कहा कि उत्तर कोरिया को अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को संख्या और गुणवत्ता, दोनों स्तरों पर लगातार मजबूत करते रहना चाहिए।

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