Nepal PM Balen Shah Press Conference For Nepal Flood Relief Campaign: नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ और अचानक हुए भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई, जबकि हजारों परिवार बेघर होकर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। संकट की इस घड़ी में प्रधानमंत्री बालेन शाह ने राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के साथ-साथ वैश्विक मंच पर जलवायु परिवर्तन का मुद्दा भी मजबूती से उठाया है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा कि नेपाल जैसे देशों को जलवायु परिवर्तन की गंभीर कीमत चुकानी पड़ रही है, जबकि वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में उनका योगदान बेहद कम है। उन्होंने अमीर और विकसित देशों से क्लाइमेट जस्टिस के तहत विशेष आर्थिक सहायता और प्रभावित देशों के लिए उचित मुआवजे की मांग की है।
नेपाल सरकार ने रसुवा, नुवाकोट और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। नेपाली सेना, सुरक्षा बल और स्थानीय प्रशासन की टीमें दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
कई स्थानों पर सड़क और पुल टूटने के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में मुश्किलें आ रही हैं। ऐसे इलाकों में हेलीकॉप्टरों और विशेष बचाव टीमों की मदद ली जा रही है। सरकार ने बेघर परिवारों के लिए अस्थायी राहत शिविर और आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी शुरू की है।
आपदा के बाद नेपाल को अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भी जरूरत महसूस हो रही है। राहत कार्यों को मजबूत बनाने के लिए तकनीकी सहायता, बचाव उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधनों की जरूरत है।
भारत समेत पड़ोसी देशों के सहयोग से प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में मलबा हटाना और संपर्क मार्ग बहाल करना सरकार के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने इस आपदा को केवल नेपाल की समस्या नहीं बल्कि वैश्विक जलवायु संकट का परिणाम बताया है। उनका कहना है कि औद्योगिक विकास और बड़े पैमाने पर कार्बन उत्सर्जन करने वाले देशों की जिम्मेदारी बनती है कि वे जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित गरीब और विकासशील देशों की मदद करें।
नेपाल जैसे हिमालयी देशों को ग्लेशियर पिघलने, अनियमित बारिश, अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाओं का लगातार सामना करना पड़ रहा है। इसलिए केवल मानवीय सहायता पर्याप्त नहीं है, बल्कि पुनर्निर्माण और भविष्य की आपदाओं से बचाव के लिए दीर्घकालिक वित्तीय सहयोग जरूरी है।
बाढ़ के बाद नेपाल के सामने प्रभावित गांवों के पुनर्वास, सड़क-पुल निर्माण और बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने की बड़ी चुनौती है। हजारों परिवारों को लंबे समय तक आर्थिक और सामाजिक सहायता की जरूरत पड़ सकती है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा कि नेपाल इस त्रासदी को अंतरराष्ट्रीय जलवायु मंचों पर उठाएगा और जलवायु परिवर्तन से प्रभावित देशों के अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करेगा। सरकार का मानना है कि वैश्विक सहयोग और जिम्मेदारी तय किए बिना भविष्य में ऐसी आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटना मुश्किल होगा।