Major Reason Behind Nepal Floods: नेपाल में बुधवार की सुबह आई अचानक तेज बाढ़ की वजह से कई इलाकों में काफी तबाही का मंजर देखने को मिला। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, अधिकारिक रूप से मृतकों की संख्या को लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक, 384 पर्यटक लापता हैं, जिसमें से 291 पर्यटक विदेशी बताए जा रहे हैं। वहीं, इसमें से ज्यादा भारत से हैं। इनकी संख्या 100 से अधिक बताई जा रही है।
उत्तरी नेपाल के कुछ हिस्सों में आई भीषण बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर जान-मान की नुकसान की संभावना जताई जा रही है। बाढ़ की तेज धार में देखते ही देखते कई गांव बह गए। इसके साथ ही हाइड्रोइलेक्ट्रिक डैम, पूल और सड़कों को भी नुकसान पहुंचा है।
नेपाल की राजधानी काठमांडू के उत्तर स्थित रसुवा इलाके में बुधवार तड़के अचानक भारी बाढ़ आ गई। ये वो इलाका है, जो तिब्बत से सटा है और चीन के साथ नेपाल के मुख्य व्यापार मार्ग पर मौजूद है। अधिकारियों के मुताबकि, यह बाढ़ तिब्बत से नेपाल में बहने वाली 'भोटेकोशी' नदी में गिरी बर्फ के पिघलने के कारण आई थी। इसके साथ ही त्रिशूली नदी में भी बाढ़ आई है।
नदी के निचले हिस्सो में स्थित कई जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। रसुवा के मुख्य जिला अधिकारी नरेंद्र परियार के हवाले से बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अधिकारियों को भारी नुकसान की आशंका है। फिलहाल नुकसान का आकलन करना जल्दबाजी होगी।
वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों के मुताबिक, अचानक आई भारी तबाही का मुख्य कारण नेपाल नहीं बल्कि तिब्बत बॉर्डर के ऊपर बना कैचमेंट एरिया (जलग्रहण क्षेत्र) था। तिब्बत के गोसाईंकुंडा क्षेत्र में आए 4.4 रिएक्टर के भूकंप से हिमस्खलन हुआ। इसकी वजह से ग्लेशियल लेक या हिमताल टूट गई और लाखों गैलन पानी मलवे के साथ नीचे की ओर बह निकला।
तिब्बत से बहते हुए नेपाल को आने वाली भोटेकोशी नदी (जो आगे चलकर बिहार में कोसी नदी के रूप में जानी जाती है) जो काफी तेज ढलान वाली संकरी नदी है। तिब्बत में ग्लेशियर फटने के बाद पानी और मलबे का अचानक तेज बहाव शुरू हुआ, तो संकरी नदी और तेज ढलान होने के कारण पानी काफी विनाशकारी रूप ले लिया और निचले मैदानी क्षेत्रों में काफी नुकसान पहुंचाया।
हाई माउंटेन क्षेत्रों में जम चुकी जमीन (पर्माफ्रॉस्ट) तापमान में बढ़ोतरी और भूकंप के तेज झटकों से ढह गई। जब बड़े-बड़े चट्टानें और मलबों का ढेर नदियों में गिरा, तो उसने कुछ समय के लिए आर्टिफिशियल बांध का रूप ले लिया। तेज पानी का प्रेशर बढ़ने पर यह 'प्राकृतिक बांध' अचानक टूट गया, जिससे नदियों में अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई।
तबाही को भयानक रूप देने में मानवीय भूलों की भी बड़ी भूमिका रही। नदियों के प्राकृतिक बहाव वाले क्षेत्रों पर बिना किसी खास योजना के निर्माण कार्य किए गए थे। कमजोर सड़कों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के निर्माण ने पहाड़ों को और अस्थिर बना दिया था, जिसके कारण पानी का बहाव रोक पाने में पूरा बुनियादी ढांचा पूरी तरह असफल साबित हुआ।
ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालयी क्षेत्र का तापमान लगातार बढ़ रहा है। इससे ऊंचे ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और नई अस्थिर झीलें बन रही हैं। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि मानसून के दौरान अचानक ऐसी विनाशकारी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ने के पीछे जलवायु परिवर्तन एक बड़ा कारक है।
नेपाल में आई अचानक बाढ़ और भीषण तबाही का असर भारत के सीमावर्ती राज्यों बिहार और उत्तर प्रदेश में देखने को मिल सकते हैं। नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदियां आगे चलकर भारत की गंडक और कोसी नदियों में मिलती हैं। गंडक नदी नेपाल और भारत के बिहार में बहने वाली गंगा की एक प्रमुख सहायक नदी है, जिसे नेपाल में नारायणी और काली गंडक भी कहा जाता है।
नेपाल से भारी मात्रा में पानी नीचे आने के कारण बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। जिसके देखते हुए राज्य सरकारों ने अलर्ट जारी कर दिए हैं