Nepal Flash Flood Timeline: नेपाल में बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। करीब सुबह 9 बजे भोटेकोशी नदी में अचानक उफान आने के बाद देखते ही देखते सैलाब ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। गांव, सड़कें और हाइड्रोपावर से जुड़ा बुनियादी ढांचा बाढ़ के तेज बहाव में बह गया। अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
अचानक आई इस बाढ़ को लेकर शुरुआती आकलन में बारिश या बादल फटने के बजाय भूकंप और एवलांच (बर्फ व चट्टानों के खिसकने) को संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, बाढ़ की सटीक वजह की अभी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है।
भोटेकोशी नदी में आया यह सैलाब लगातार आगे बढ़ रहा है। इसके चलते नेपाल के कई जिलों में खतरा बढ़ गया है। नेपाल से सटे बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है और अगले 24 से 48 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं।
भोटेकोशी नदी का उद्गम तिब्बत में होता है, जहां इसे ल्हेंडे नदी के नाम से जाना जाता है। नेपाल में प्रवेश करने के बाद यह भोटेकोशी नदी के रूप में बहती है और आगे जाकर त्रिशूली नदी में मिलती है।
भोटेकोशी की सहायक नदियों के जरिए इसका पानी आगे गंडक नदी तंत्र से जुड़ता है। गंडक नदी नेपाल से होकर भारत में प्रवेश करती है और बिहार तक पहुंचती है। यही वजह है कि नेपाल में आई इस अचानक बाढ़ को लेकर बिहार में भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे तिब्बती क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र गोसाईकुंड से करीब 47 किलोमीटर दूर बताया गया है।
इसके करीब 23 मिनट बाद, सुबह लगभग 9 बजे भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई। न्यूज एजेंसियों के मुताबिक, नदी का पानी तेजी से आसपास के गांवों, सड़कों और हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ा।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भूकंप और बाढ़ के बीच सीधा संबंध कितना है।
नेपाल में अचानक आई बाढ़ की वजह को लेकर विशेषज्ञों के शुरुआती आकलन में एवलांच की संभावना भी सामने आई है।
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में कहा कि शुरुआती रिपोर्टों से संकेत मिलते हैं कि क्षेत्र में आए भूकंप की वजह से एवलांच हुआ हो सकता है, जिसके बाद नदी में अचानक पानी का तेज बहाव आया।
काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट से जुड़े विशेषज्ञों ने भी नेपाली हिस्से में ल्हेंडे खोला नदी में बर्फ और चट्टानों के एवलांच को संभावित वजह बताया है। हालांकि, इसका कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
जलवायु विशेषज्ञों के मुताबिक, एवलांच के कारण नदी का रास्ता अस्थायी रूप से रुक गया होगा। इसके बाद जमा पानी और मलबे ने अचानक नीचे की ओर तेज रफ्तार से बहना शुरू किया, जिससे फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति पैदा हुई।
सुबह करीब 9 बजे भोटेकोशी नदी में उफान आने के बाद सबसे पहले रसुवा जिले में तबाही देखने को मिली। तिमुरे और स्याप्रुबेसी इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। ये दोनों इलाके चीन-नेपाल सीमा के करीब स्थित हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, नदी के किनारे बसे कई इलाके पानी और मलबे के तेज बहाव में बह गए। कई लोग लापता बताए जा रहे हैं।
इसके बाद भोटेकोशी नदी का पानी आगे बढ़ते हुए त्रिशूली नदी में पहुंचा। त्रिशूली नदी में जलस्तर बढ़ने के बाद नुवाकोट जिले में भी भारी तबाही हुई।
नुवाकोट में कई बहुमंजिला इमारतें, वाहन और अन्य सामान भारी मात्रा में आए मलबे में दब गए। रिपोर्टों के मुताबिक, त्रिशूली बाजार के आसपास करीब 60 घर बह गए, जबकि दो पुलों को भी नुकसान पहुंचा है।
अचानक आई बाढ़ से नेपाल के कई जिले प्रभावित हुए हैं। इनमें रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं।
इसके अलावा गोरखा, चितवन और तनाहुन में भी नदी किनारे और निचले इलाकों में खतरा बना हुआ है। अधिकारियों ने लोगों को भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदियों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी है।
नेपाल में फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन ने कई जिलों को हाई अलर्ट पर रखा है। हालांकि, प्रमुख नदियों में पानी का स्तर फिलहाल खतरे के निशान से नीचे बताया गया है।
हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग के मुताबिक, अगले तीन दिनों में कोशी और नारायणी नदी बेसिन में पानी के बहाव में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है।
गंडकी और लुंबिनी प्रांतों की छोटी नदियों में भी आने वाले दिनों में अचानक जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई गई है।
अधिकारियों के मुताबिक, अचानक बढ़ने वाला पानी स्थानीय स्तर पर बाढ़ और शहरों में जलभराव की स्थिति पैदा कर सकता है। खासकर छोटी सहायक नदियों के आसपास बसे निचले इलाकों में खतरा ज्यादा है।
नेपाल में जारी इस जलप्रलय के बीच अब राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। वहीं, भारत में भी नेपाल से सटे इलाकों और खासकर बिहार में स्थिति पर नजर रखी जा रही है।