Awami League Party Merger: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के दिल्ली से संबोधन के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। BNP सांसद नासिर उद्दीन चौधरी ने अपनी पार्टी का शेख हसीना की अवामी लीग के साथ विलय करने की मांग की है। इस दावे से पूरे देश के राजनीतिक हलकों में सनसनी मच गई है।
प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP सरकार लंबे समय से भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है। लेकिन उनकी ही पार्टी के सांसद नासिर चौधरी का अवामी लीग को सहयोगी बताना और विलय की वकालत करना BNP नेतृत्व के रुख से बिल्कुल विपरीत है, जिससे पार्टी में मतभेद गहरा गए हैं।
बीएनपी सांसद नासिर चौधरी ने सुनामगंज-2 निर्वाचन क्षेत्र की रैली में यह विवादित बयान दिया। उन्होंने थाना पॉइंट पर आयोजित रैली में कहा कि अवामी लीग हमारी दुश्मन नहीं, बल्कि सहयोगी पार्टी है। इस टिप्पणी ने देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
चौधरी ने कहा कि अवामी लीग के नेताओं ने BNP के साथ मिलकर 1971 के मुक्ति संग्राम में हिस्सा लिया था। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही अवामी लीग का उनकी पार्टी में पूर्ण विलय हो जाएगा। हालांकि, BNP के शीर्ष नेतृत्व ने इस बयान को पूरी तरह खारिज किया है।
इधर, दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शेख हसीना ने अपनी भविष्य की योजनाओं का खुलासा किया था। दो वर्षों में पहली बार मीडिया को संबोधित करते हुए हसीना ने कहा कि उनकी योजना इस साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की है, जो 1971 के मुक्ति संग्राम की वर्षगांठ का अवसर होगा।
हसीना ने कहा कि 1971 में भारतीय सैन्य हस्तक्षेप के बाद पाकिस्तानी सेना की करारी हार के साथ ही बांग्लादेश को स्वतंत्रता मिली थी। गौरतलब है कि जुलाई और अगस्त 2024 में हुए हिंसक छात्र विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना की सरकार सत्ता से बेदखल हो गई थी, जिसके बाद उन्हें भारत आना पड़ा।
सांसद चौधरी के इस बयान पर बांग्लादेश सरकार ने भी बेहद तीखी और गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रधानमंत्री के वरिष्ठ सलाहकार ने कहा कि शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस और BNP सांसद का यह बयान जुलाई विद्रोह के शहीदों का खुला अपमान है।
बीएनपी सरकार लंबे समय से नई दिल्ली से ‘भगोड़ी शेख हसीना’ को प्रत्यर्पित करने और उन्हें राजनीतिक मंच न देने की मांग कर रही है। ऐसे में सांसद की इस विवादास्पद टिप्पणी से तारिक रहमान की सरकार और BNP नेतृत्व का रुख बिल्कुल अलग और विपरीत राय वाला है।