मादुरो की बर्बाद में शामिल पांच किरदार (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

वो पांच किरदार जिनकी गद्दारी ने मादुरो को किया बर्बाद! ईरानी ड्रोन से सुरक्षाकर्मी तक थे शामिल

US Military Operation in Venezuela: अमेरिकी सेना ने ऑपरेशन 'एब्सोल्यूट रिजॉल्व' के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया, कई देशों और विश्वासघातियों शामिल थे।

अक्षय साहू

US Military Operation in Venezuela: तीन जनवरी 2026 को अमेरिकी सेना ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया। इस ऑपरेशन ने दुनिया भर में खलबली मचाई, और यह घटनाक्रम कई कारणों और व्यक्तियों की वजह से हुआ जिन्होंने मादुरो के खिलाफ विश्वासघात किया। 

मादुरो के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से पहले कई देशों और खुफिया एजेंसियों ने अपनी भूमिका निभाई, जिनमें चीन, रूस, ईरान और एक विश्वासघाती सुरक्षा कर्मी शामिल थे। इस लेख में हम इन महत्वपूर्ण किरदारों का विश्लेषण करेंगे जिन्होंने मादुरो को धोखा दिया।

चीन की संदिग्ध भूमिका

मादुरो की गिरफ्तारी के पीछे सबसे पहला और विवादित किरदार चीन का माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, 2 और 3 जनवरी की दरमियानी रात जब अमेरिका ने वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई शुरू की, उससे कुछ देर पहले चीन के अधिकारियों ने मादुरो और उनकी पत्नी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद चीन की खुफिया एजेंसी 'मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी' को किसी प्रकार की जानकारी नहीं मिली कि इस मुलाकात के तुरंत बाद अमेरिका वेनेजुएला पर हमला करेगा। इस संदर्भ में एक थ्योरी यह भी सामने आई है कि क्या अमेरिका और चीन के बीच पर्दे के पीछे कोई डील हुई थी, जिसके बाद मादुरो की लोकेशन अमेरिकी एजेंसियों तक पहुंची। यदि ऐसा है, तो यह मादुरो के लिए एक गंभीर कूटनीतिक झटका होगा।

मादुरो के सुरक्षाकर्मियों ने दी गद्दारी

मादुरो का दूसरा धोखा उस सुरक्षा कर्मी से आया, जिस पर वे सबसे ज्यादा विश्वास करते थे। मादुरो और उनकी पत्नी को यह आशंका थी कि अमेरिका कभी भी उन्हें गिरफ्तार कर सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने मादुरो पर 451 करोड़ रुपये का इनाम भी रखा था, इसलिए मादुरो कभी एक जगह पर ज्यादा समय तक नहीं रुकते थे और उन्होंने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में कई बदलाव किए थे। मादुरो के कई सुरक्षा कर्मियों को इस पर भरोसा था, लेकिन इनमें से एक ने उनके खिलाफ काम किया और मादुरो की हर गतिविधि CIA को बता दी। यह विश्वासघात एक लोकप्रिय कहावत 'हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था' के तर्ज पर था।

रूस के हथियारों की नाकामी

तीसरे नाम के रूप में रूस का नाम सामने आता है। मादुरो ने हमेशा यह विश्वास जताया था कि वेनेजुएला को रूस के ताकतवर एयर डिफेंस सिस्टम S-300 और अन्य रक्षा तकनीकी से सुरक्षा मिलती रहेगी। रूस के हथियारों पर विश्वास करते हुए मादुरो ने यह सोचा था कि अमेरिकी सेना का हमला वेनजुएला पर असरदार नहीं होगा। हालांकि, सच्चाई कुछ और ही थी। अमेरिकी हमले के दौरान, कराकास के एयरबेस पर तैनात रूस के एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट हो गए और S-300 की बैटरियां भी सक्रिय नहीं हो पाईं।

ईरान के ड्रोन की विफलता

चौथा नाम ईरान का है। ईरान ने वेनेजुएला को उन्नत ड्रोन प्रदान किए थे, जिनका उपयोग दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाता था। लेकिन ये ड्रोन भी अमेरिकी कार्रवाई के दौरान बेअसर साबित हुए। अमेरिका के 150 लड़ाकू विमानों ने इस ऑपरेशन के दौरान मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। यह स्थिति यह साबित करती है कि वेनेजुएला को जो तकनीकी सहायता मिली थी, वह अमेरिकी सैन्य ताकत के सामने कमजोर पड़ गई।

अमेरिकी कार्रवाई पर वैश्विक चुप्पी

इस घटना के बाद दुनिया में यह सवाल उठने लगा कि अमेरिका और वेनेजुएला के साथ कौन खड़ा है। अमेरिका के समर्थन में इजरायल, कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन, और अन्य पश्चिमी देशों के साथ-साथ लैटिन अमेरिकी देश भी खड़े हैं। जबकि वेनेजुएला के समर्थन में रूस, चीन, ईरान, क्यूबा, और कुछ अन्य देश खड़े हैं। रूस और चीन के पास वैश्विक सैन्य ताकत और परमाणु हथियार हैं, जिनका वेनेजुएला की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान था, लेकिन ये सारी मदद अमेरिकी सैन्य ताकत के सामने विफल हो गई। इसके अलावा अधिकत्तर देशों ने इस मामले से दूरी बनना बेहतर समझा है।

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