Saifullah Kasuri Death threatens to Asim Munir: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों ईरान के साथ जारी युद्ध को खत्म करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। हालांकि इसमें अभी तक सफलता मिलती नहीं दिखाई दे रही है। लेकिन इसी बीच उनके एक बयान ने पाकिस्तान समेत कई खाड़ी देशों में कोहराम मचा दिया है और जनता अपनी ही सरकार के विरोध में खड़ी हो गई है।
ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि वो चाहते हैं कि अब्राहम अकॉर्ड का विस्तार किया जाए और इसमें सऊदी अरब और पाकिस्तान जैसे बड़े मुस्लिम देशों को शामिल किया जाए। ट्रंप के इस बयान ने पाकिस्तान में शहबाज शरीफ सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर दी। संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने पाकिस्तान सरकार को खुली धमकी दी है कि अगर अमेरिकी बात मानी तो अच्छा नहीं होगा।
अब्राहम अकॉर्ड अमेरिका की मध्यस्तता में इजरायल और खाड़ी देशों के बीच कराया एक समझौता है। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच शांति, कूटनीति और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। अब क्योंकि अधिकतर मुस्लिम जनता ऐतिहासिक तौर पर इजरायल को अपना दुश्मन मानते हैं, ऐसे किसी मुस्लिम देश का इजरायल से समझौता करना वहां की जनता धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है। हालांकि, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मोरक्को और सूडान जैसे देश इसका हिस्सा हैं। लेकिन सऊदी अरब और पाकिस्तान इसके विरोध में हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने जब इन देशों को अब्राहम अकॉर्ड में शामिल करने की बात कही तो इसके तुंरत ही इसके विरोध में आवाजें उठने लगी। लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी ने पाकिस्तान सरकार को धमकी दी है और कहा है कि अगर कोई इजरायल का समर्थन करता है, तो उसे हम खत्म कर देंगे। कसूरी ने शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर पाकिस्तान का कोई भी नेता इजरायल का समर्थन करता है तो उसे मार दिया जाएगा, तबाह कर दिया जाएगा और बर्बाद कर दिया जाएगा।
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पाकिस्तान ने हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। लेकिन पाकिस्तान में चर्चा तेज हो गई है कि शहबाज शरीफ सरकार अंदरखाने इजरायली नेताओं के संपर्क में है और समझौता कर सकते हैं। ऐसे में लश्कर-ए-तैयबा की धमकी ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान में कट्टरपंथी और जिहादी आतंकी संगठन इस समझौते के खिलाफ हैं और वो किसी भी हाल में ट्रंप के सपने को पूरी नहीं होने देंगे।