

Lashkar-e-Taiba Terrorist Amir Hamza Killed in Lahore: पाकिस्तान के लाहौर से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसमें भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक महत्वपूर्ण सदस्य अमीर हमजा (Amir Hamza) को गोली मारी गई है। यह हमला अज्ञात हमलावरों द्वारा एक न्यूज चैनल के बाहर किया गया, जिससे यह घटना और भी रहस्यमय बन गई है।
अमीर हमजा (Amir Hamza) लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हफीज सईद के करीबी सहयोगी रहे हैं और भारत के खिलाफ कई आतंकवादी हमलों में उनकी संलिप्तता रही है। हमजा का नाम भारत में बड़े पैमाने पर चर्चा में रहा है, खासकर जब यह बात सामने आई थी कि उन्होंने सईद के साथ मिलकर लश्कर-ए-तैयबा का गठन किया था। यह आतंकी संगठन कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में कई प्रमुख हमलों के लिए जिम्मेदार है।
हमला होते ही अमीर हमजा (Amir Hamza) को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां हमलावरों की पहचान करने और घटना की जांच करने में जुटी हुई हैं। पाकिस्तान की पंजाब प्रांतीय पुलिस ने बयान जारी किया है कि हमले की पूरी जांच की जाएगी और दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। भारत के लिए यह घटना खासकर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमीर हमजा लश्कर-ए-तैयबा के कई महत्वपूर्ण हमलों में शामिल था, जिनमें भारतीय सेना और नागरिकों को निशाना बनाया गया था। अमीर हमजा का आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा भारत के खिलाफ लंबे समय से सक्रिय है, और इसके कई प्रमुख हमले कश्मीर में हुए हैं।
हमजा लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रमुख सदस्य है और इसे हाफिज सईद का करीबी सहयोगी माना जाता है। आतंकी समूह के संस्थापक सदस्य के रूप में उसने तीन दशकों में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। खासतौर पर उसने लश्कर के प्रचार विंग को आकार देने और आम लोगों को आतंकी गतिविधियों में शामिल करने के अभियानों में अहम भूमिका निभाई।
अमेरिका के ट्रेजरी विभाग के 2012 के बयान के अनुसार, हमजा लश्कर की केंद्रीय सलाहकार समिति का हिस्सा था और हाफिज सईद के अधीन समूह के बाहरी संबंधों को संभालने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। 2010 तक उसने लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े धार्मिक संगठनों में भी काम किया और सईद द्वारा संचालित लश्कर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट में एक उच्च पद पर रहा। ट्रेजरी विभाग के मुताबिक, 2010 तक हमजा लश्कर के प्रचार प्रसार में सक्रिय रूप से शामिल था, वह लश्कर के साप्ताहिक अखबार का संपादन करता था और उसमें नियमित लेख लिखता था।