Latest Strict Iran Warning News: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही 60 दिन के सीजफायर की चर्चाओं के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने बहुत बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अपने टेलीग्राम चैनल पर अमेरिका को 'महान शैतान' और इजरायल को उसका 'प्रशिक्षित जानवर' बताया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच युद्ध विराम की शर्तों पर लगातार बातचीत हो रही है। इस ताजा बयान ने मध्य पूर्व में शांति की कोशिशों के बीच एक बार फिर से तनाव बढ़ाने का काम किया है।
ईरान पर हाल ही में हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान के 58 साल के नए सुप्रीम लीडर सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आए हैं। हालांकि वह अपने कड़े संदेश लगातार टेलीग्राम के जरिए दे रहे हैं और अपनी सेना की पूरी सराहना कर रहे हैं। खामेनेई ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगले 25 वर्षों में इजरायल का नामोनिशान पूरी तरह से मिट जाएगा। यह गंभीर चेतावनी दुनिया और पश्चिमी देशों के लिए बहुत ही गहरी चिंता का नया विषय बन गई है।
खामेनेई ने सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे अपने सभी पड़ोसी देशों को भी एक बहुत कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि खाड़ी देश अब अपने यहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ बिल्कुल भी नहीं होने देंगे। अगर उन्होंने अमेरिकी ठिकानों को ढाल बनाया तो ईरान इन सभी देशों को भी किसी भी कीमत पर नहीं बख्शेगा। अमेरिका का खत्म होता दबदबा ईरानी नेता ने अपने बयान में दावा किया है कि मध्य पूर्व में अमेरिका का पुराना दबदबा अब हमेशा के लिए खत्म हो गया है। अमेरिका चाहकर भी उस पुराने दौर को वापस नहीं ला सकता है और वह लगातार अपना प्रभाव पूरी तरह से खो रहा है। हर गुजरते दिन के साथ अमेरिका अपनी पुरानी स्थिति से बहुत दूर होता जा रहा है और अब उसके लिए यहां सुरक्षित ठिकाने नहीं हैं।
एक तरफ ईरान के तीखे बयान आ रहे हैं और दूसरी तरफ युद्ध विराम के लिए 60 दिन का समय देने पर विचार हो रहा है। दोनों पक्षों ने एक ऐसे समझौता ज्ञापन की दिशा में कुछ अहम प्रगति के सकारात्मक संकेत दिए हैं जो युद्ध को रोक सकता है। वार्ताकार इस कोशिश में हैं कि इस तनावपूर्ण माहौल को किसी तरह शांत करके एक बड़े और व्यापक समझौते पर पहुंचा जा सके।
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ईद अल-अधा के मौके पर दिए गए अपने लिखित संदेश में मोजतबा खामेनेई ने कहा कि समय का पहिया अब कभी पीछे नहीं घूमेगा। इस क्षेत्र के राष्ट्र अब अमेरिकी सेना के लिए ढाल का काम बिल्कुल नहीं करेंगे और पश्चिमी देशों का यहां कोई स्थान नहीं होगा। ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव और सबसे कड़ा कदम उठाने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठा है।