Lahore Old Street Names Restored: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए लाहौर की कई पुरानी सड़कों का नाम बदलने का फैसला किया है। इन सड़कों को अब उन नामों से पुकारा जाएगा जो आजादी और बंटवारे से पहले इस्तेमाल किए जाते थे। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का मकसद लाहौर की पुरानी सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत को फिर से जिंदा करना है।
आजादी और बंटवारे के बाद लाहौर की अनेक सड़कों, चौकों और मोहल्लों के नाम धार्मिक और राजनीतिक फायदे के लिए बदल दिए गए थे। पुराने हिंदू, सिख और ब्रिटिशकालीन नाम हटाकर उनकी जगह इस्लामी, पाकिस्तानी या स्थानीय नेताओं के नाम रखे गए थे। अब पंजाब सरकार ने इन पुराने नामों को वापस लाने की योजना को मंजूरी दी है।
हाल ही में शहर के कई इलाकों में पुराने नामों वाले बोर्ड लगाए गए हैं। उदाहरण के तौर पर इस्लामपुरा का नाम फिर से कृष्ण नगर कर दिया गया है। इसी तरह बाबरी मस्जिद चौक का नाम बदलकर जैन मंदिर चौक रखा गया है। पिछले दो महीनों में नौ स्थानों के नाम बदले जा चुके हैं। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री मरियम नवाज की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि यह कदम लाहौर की ऐतिहासिक पहचान को बचाने के लिए उठाया गया है। इस योजना का नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ कर रहे हैं, जो लाहौर विरासत क्षेत्र पुनरुद्धार परियोजना के प्रमुख भी हैं।.
लाहौर की जिन जगहों के पुराने नाम वापस लाने की बात हो रही है, उनमें कृष्ण नगर, संत नगर, धरमपुरा, लक्ष्मी चौक, जैन मंदिर रोड, भगवान पुरा, शांति नगर और राम गली जैसी कई ऐतिहासिक जगहें शामिल हैं।
इसके अलावा मिंटो पार्क में पुराने क्रिकेट मैदानों और पारंपरिक कुश्ती अखाड़े को फिर से बनाने की योजना भी है। यह वही जगह है जहां कभी गामा पहलवान और इमाम बख्श जैसे मशहूर पहलवान मुकाबला करते थे। विभाजन से पहले यहां हिंदू समुदाय दशहरा भी मनाता था।
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भारतीय क्रिकेटर लाला अमरनाथ भी विभाजन से पहले लाहौर के क्रिकेट क्लबों में खेला करते थे। बाद में 1978 में जब वह भारतीय टीम के साथ लाहौर गए, तब उन्होंने अपने पुराने क्लब का दौरा भी किया था।