भूगोल या इतिहास... सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की पाकिस्तान को सीधी चेतावनी, ऑपरेशन सिंदूर की दिलाई याद

General Upendra Dwivedi ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह भारत के खिलाफ साजिश बंद नहीं करता है तो उसे तय करना होगा कि वह भविष्य में भूगोल का हिस्सा रहना चाहता है या इतिहास का।
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जनरल उपेंद्र द्विवेदी, फोटो- सोशल मीडिया
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Army Chief Pakistan Warning: थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शनिवार को इस्लामाबाद को एक सख्त सैन्य संदेश देते हुए चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान आतंकवादियों को शरण देना और भारत के खिलाफ अपनी गतिविधियां जारी रखता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

कार्यक्रम के दौरान जब जनरल द्विवेदी से पूछा गया कि यदि पिछले साल 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसी परिस्थितियां दोबारा बनती हैं, तो भारतीय सेना की प्रतिक्रिया क्या होगी, तो उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा, "पाकिस्तान को यह तय करना होगा कि वे भूगोल या इतिहास का हिस्सा बनना चाहते हैं या नहीं।"

'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ

सेना प्रमुख की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब देश और भारतीय सेना 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ मना रहे हैं। कि पिछले साल 7 मई को पहलगाम में हुए घातक आतंकी हमले के प्रतिशोध में भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था। इस अभियान के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित कई आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे।

88 घंटे चला था सैन्य संघर्ष

दस्तावेजों के अनुसार, 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी देशों के बीच सैन्य संघर्ष लगभग 88 घंटों तक चला था। पाकिस्तान की ओर से जवाबी कार्रवाई की कोशिशों के बाद भारत ने फिर से पलटवार किया और यह पूरा सैन्य टकराव 10 मई की शाम को दोनों देशों के बीच एक आपसी समझ बनने के बाद ही थमा था। जनरल द्विवेदी के बयान ने साफ कर दिया है कि भविष्य में भी भारत अपनी सुरक्षा के लिए कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

इसके साथ ही सेना संवाद कार्यक्रम में सिविल-मिलिट्री इंटरैक्शन के दौरान जनरल द्विवेदी ने कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं है। अब इसमें साइबर, अंतरिक्ष और कॉग्निटिव क्षेत्र भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय सेना ने 2026-27 को ‘ईयर ऑफ नेटवर्किंग एंड डेटा सेंट्रिसिटी’ घोषित किया है। इसके तहत सेना नई तकनीकों और डेटा-आधारित युद्ध क्षमताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है।

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