

Tukaram Mundhe Chief Minister Demand: महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में इन दिनों एक बेहद अनोखी और बड़ी चर्चा छिड़ गई है। अपनी कड़क कार्यशैली और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाने वाले देश के चर्चित IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को सीधे महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाने की मांग की जा रही है।
यह मांग किसी आम राजनीतिक मंच से नहीं, बल्कि सीधे देश के गृहमंत्री अमित शाह के दरबार तक पहुंच चुकी है।
मराठी एकीकरण समिति और आम्ही गिरगावकर नामक सामाजिक संगठनों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को एक पत्र भेजा है, जिसमें तुकाराम मुंढे को राज्य की कमान सौंपकर मुख्यमंत्री बनाने की पुरजोर मांग की गई है। यह पत्र मुंबई के हुतात्मा चौक पर आयोजित होने वाले संगठनों के एक बड़े आंदोलन से ठीक पहले भेजा गया है, जिसने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।
तुकाराम मुंढे की लोकप्रियता सिर्फ महाराष्ट्र में ही नहीं बल्कि पूरे देश में फैली हुई है। वर्तमान में वे FDA के आयुक्त का पद संभाल रहे हैं। उन्होंने पदभार संभालते ही मिलावटखोरों और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ ऐसा कड़ा हंटर चलाया है कि आम नागरिकों में उनकी लोकप्रियता आसमान छूने लगी है।
उनके द्वारा लिए गए कुछ बड़े फैसलों ने उन्हें जनता का चहेता बना दिया है।
दिग्गज होटलों पर कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन करने वाले राज्य के बड़े-बड़े होटलों और रेस्टोरेंटों के लाइसेंस निलंबित और रद्द कर दिए गए हैं।
दूध और मिठाई में मिलावट पर रोक: उन्होंने जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले मिलावटी दूध और मिलावटी मिठाइयों के खिलाफ एक बड़ी मुहिम शुरू की है।
आंगनवाड़ी भोजन की जांच: आंगनवाड़ियों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता की जांच भी उनके विभाग द्वारा कराई जा रही है।
दवाइयों पर सख्त निर्देश: उन्होंने दवा विक्रेताओं को कड़ी चेतावनी दी है कि मरीजों को केवल डॉक्टर के पर्चे के अनुसार जरूरत की ही दवाइयां और गोलियां दी जाएं, अनावश्यक रूप से ज्यादा दवा बेचने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
इन ताबड़तोड़ कार्रवाइयों के बाद आम जनता के बीच यह विश्वास पुख्ता हुआ है कि उनके आने से खाद्य पदार्थों में मिलावट काफी हद तक कम हुई है। इसी वजह से अब उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में देखने की जनभावना बलवती हो रही है।
इस बड़ी मांग के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह जांबाज अधिकारी सच में अपनी सिविल सर्विस छोड़कर राजनीति के मैदान में उतरेगा? इस मुद्दे पर खुद तुकाराम मुंढे का रुख हमेशा सस्पेंस से भरा रहा है। अलग-अलग समय पर दिए गए इंटरव्यू में जब भी उनसे यह सवाल पूछा गया कि क्या आप भविष्य में राजनीति में प्रवेश करेंगे?, तो उन्होंने कभी भी इसका सीधा या स्पष्ट जवाब नहीं दिया। मुंढे ने हमेशा यही कहा है, मैं अपने भविष्य के बारे में अभी कुछ भी नहीं बता सकता।
उनके इस रहस्यमयी जवाब के बीच, अब अमित शाह को लिखे गए इस पत्र ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए कयासों और चर्चाओं को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह प्रशासनिक सिंघम सच में महाराष्ट्र की सत्ता की कमान संभालेगा या फिर यह मांग केवल जनता के भारी समर्थन की एक बानगी बनकर रह जाएगी।