पाकिस्तानी नेताओं से मिले चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग (फोटो- सोशल मीडिया) 
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PM मोदी के जाते ही पाक तिकड़ी से मिले जिनपिंग, चीन के साथ मिलकर क्या खिचड़ी पका रहे शरीफ और मुनीर

SCO Summit: 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन के तियानजिन में हुए SCO शिखर सम्मेलन में शरीफ-मुनीर की मौजूदगी और शी जिनपिंग से मुलाकात ने पाकिस्तानी सत्ता की असली ताकत पर सवाल खड़े कर दिए।

अक्षय साहू

Asim Munir In SCO Summit: चीन के तियानजिन शहर में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया। जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शनिवार को छह दिवसीय यात्रा पर चीन पहुंचे थे। इस दौरे के दौरान शरीफ की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई। हालांकि सोमवार पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर भी चीन पहुंच गए। इसके मीडिया तो ध्यान शहबाज शरीफ से हटकर पाकिस्तानी सेना प्रमुख पर आकर रुक गई।

शिखर सम्मेलन समाप्त होने के बाद मंगलवार को बीजिंग के ग्रेट हॉल में जब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की, तो उनके साथ जनरल आसिम मुनीर और डिप्टी पीएम इशाक डार भी मौजूद थे। इस मीटिंग की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग ये कहते नजर आए कि पाकिस्तान की सत्ता पर असली राज आसिम मुनीर का चलता है, शहबाज शरीफ केवल कठपुतली है।

डार ने एक्स पर शेयर की तस्वीर

बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग, द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई। इशाक डार ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा करते हुए लिखा, “राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दूरदर्शी नेतृत्व में हमारी सदाबहार रणनीतिक साझेदारी और मजबूत हुई है, जिससे शांति, संपर्क और साझा समृद्धि को बढ़ावा मिल रहा है। हम बीजिंग और तियानजिन में चीनी मेजबानों की गर्मजोशी भरी मेहमाननवाजी के लिए आभारी हैं।”

वहीं, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी शी जिनपिंग की जमकर प्रशंसा की और उन्हें "ताकत और स्थिरता के प्रतीक" बताया। इसके साथ ही उन्होंने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देश 'आयरन ब्रदर्स' हैं और साझा विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं।

SCO में शामिल होने वाले पहले सेना प्रमुख

इस बैठक में एक खास बात यह रही कि आसिम मुनीर SCO सम्मेलन में भाग लेने वाले पहले पाकिस्तानी सेना प्रमुख बने। उनकी उपस्थिति ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान की नीति और कूटनीति में सेना की भूमिका अब भी निर्णायक है। शहबाज शरीफ के साथ उनकी यह संयुक्त मौजूदगी न केवल पाकिस्तान की आंतरिक शक्ति संरचना को उजागर करती है, बल्कि चीन के साथ सैन्य-सामरिक रिश्तों को भी नया आयाम देती है।

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