इजरायल के नागरिक। सोर्स: सोशल मीडिया
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क्या अरब पार्टियां इजराइल में नेतन्याहू को हटाने में मदद कर सकती हैं? यह कितना आसान है

Arab Parties Kingmakers: इजरायल चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्षी गठबंधन बहुमत से दूर हैं। अरब पार्टियों को 19 सीटें मिलने का अनुमान है। अब सरकार गठन का भविष्य उनके सहयोग पर निर्भर करेगा।

अमन कुमार पाण्डेय

Highlights:

  • इजरायल चुनाव में नेतन्याहू और विपक्ष, दोनों बहुमत से दूर।

  • जॉइंट लिस्ट और राम पार्टी को मिलाकर 19 सीटें मिलने का अनुमान।

  • सरकार गठन में अरब पार्टियों की भूमिका अहम, नए चुनाव की भी संभावना।

Israel Election News: इजरायल में आम चुनाव के नतीजों ने राजनीतिक संकट की स्थिति पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन, दोनों में से किसी को भी सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटें नहीं मिली हैं। ऐसे में इजरायल की दो अरब-बहुल पार्टियां सत्ता गठन की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

बुधवार तक करीब 86 से 90 फीसदी मतों की गिनती के बाद केंद्रीय चुनाव समिति के आंशिक नतीजों में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें और आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलने का अनुमान था। वहीं, जॉइंट लिस्ट और राम पार्टी को मिलाकर 19 सीटें मिलने की संभावना जताई गई। इनमें जॉइंट लिस्ट को 12 और राम को सात सीटें मिल सकती हैं। इजरायल की 120 सदस्यीय संसद यानी नेसेट में अरब पार्टियों का यह अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त प्रदर्शन माना जा रहा है।

अरब पार्टियों को कैसे मिलीं इतनी सीटें?

अरब पार्टियों की बढ़त के पीछे अरब समुदाय के मतदाताओं की बढ़ी भागीदारी को अहम कारण माना जा रहा है। केंद्रीय चुनाव समिति के अनुसार, कुल मतदान कम से कम 77.7 फीसदी रहा, जो 1999 के बाद किसी संसदीय चुनाव में सबसे अधिक है। इजरायली चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, अरब समुदाय में मतदान करीब 80 फीसदी तक पहुंच गया।

अरब समुदाय के मतदाताओं में सरकार और उसके दक्षिणपंथी मंत्रियों के प्रति नाराजगी को भी इसकी वजह माना जा रहा है। समुदाय लंबे समय से संगठित अपराध, आवास की कमी, भेदभाव और सरकारी निवेश की कमी जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है। वर्ष 2025 में अरब नागरिकों की हत्या के 252 मामले सामने आने का एक अनुमान भी दिया गया था।

अरब पार्टियों की सफलता से नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके गठबंधन को पिछली संसद में 68 सीटें हासिल थीं, लेकिन इस बार उसे करीब 15 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है।

क्या हैं अरब पार्टियों के राजनीतिक समीकरण?

जॉइंट लिस्ट में कम्युनिस्ट विचारधारा वाली हदाश, अरब राष्ट्रवादी तआल और फिलिस्तीनी राष्ट्रवादी बलाद शामिल हैं। यह गठबंधन आमतौर पर यहूदी नेतृत्व वाली सरकारों में शामिल होने से बचता रहा है। इसके नेता अहमद तिबी और यूसुफ जबरीन विपक्ष के साथ मिलकर नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार में सीधे शामिल होने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

दूसरी ओर, मंसूर अब्बास के नेतृत्व वाली राम पार्टी ने 2021 में बेनेट-लैपिड सरकार में शामिल होकर इतिहास बनाया था। यह किसी इजरायली गठबंधन सरकार में शामिल होने वाली पहली स्वतंत्र अरब पार्टी बनी थी। अब्बास ने संकेत दिया है कि यदि आइजेनकोट के नेतृत्व में सरकार बनने की संभावना मजबूत होती है, तो उनकी पार्टी उसमें शामिल हो सकती है।

राम पार्टी अरब समुदाय में अपराध पर नियंत्रण और आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ठोस कदम चाहती है। दोनों अरब पार्टियां आवास, भेदभाव और सरकारी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर भी प्रतिबद्धताएं मांग सकती हैं।

नेतन्याहू और विपक्ष के सामने क्या चुनौती?

नेतन्याहू ने अरब पार्टियों के समर्थन से बनने वाली सरकार को शर्मनाक बताया है। उनकी पार्टी लिकुड ने चुनाव में कथित अनियमितताओं के आरोप भी लगाए हैं, हालांकि चुनाव अधिकारियों को अब तक बड़े पैमाने पर मतों में हेरफेर का प्रमाण नहीं मिला है।

विपक्ष के लिए भी अरब पार्टियों का समर्थन लेना आसान नहीं है। आइजेनकोट ने यहूदी और लोकतांत्रिक इजरायल के सिद्धांतों को स्वीकार करने वाले दलों के साथ काम करने की बात कही है, लेकिन राम पार्टी को लेकर उनका रुख स्पष्ट नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और एविग्डोर लिबरमैन भी अरब पार्टियों के साथ गठबंधन करने का विरोध कर चुके हैं।

अब आगे क्या होगा?

इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग सभी संसदीय दलों से विचार-विमर्श के बाद किसी नेता को सरकार बनाने का पहला मौका देंगे। चुने गए नेता को गठबंधन तैयार करने के लिए 28 दिन मिलेंगे, जिसे 14 दिन बढ़ाया जा सकता है। नाकाम रहने पर दूसरे नेता को मौका दिया जा सकता है।

सरकार बनाने के तीन संभावित रास्ते हैं विपक्ष और अरब पार्टियों का सहयोग, नेतन्याहू और आइजेनकोट के बीच राष्ट्रीय एकता सरकार या फिर बातचीत विफल होने पर नए चुनाव।

अरब पार्टियां नेतन्याहू को सत्ता से बाहर रखने में मदद कर सकती हैं, लेकिन वे अकेले किसी दूसरे नेता को प्रधानमंत्री नहीं बना सकतीं। इसलिए इजरायल की अगली सरकार का फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि विपक्ष अरब पार्टियों के साथ सहयोग करने को कितना तैयार होता है।

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