इजरायल ने साउथ पारस ईरान ऑयल कॉम्पलेक्स पर हमला, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

'नर्क' से पहले ईरान में तबाही! ट्रंप की डेडलाइन के बीच इजरायल का हमला, धमाकों से दहला सबसे बड़ा गैस प्लांट

Israel Attack South Pars: इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर भीषण हमला किया है। ट्रंप की डेडलाइन से पहले हुई इस हमले के बाद ईरान ने सऊदी, UAE और कुवैत को धमकी दी है।

अमन उपाध्याय

Israel Attack South Pars Iran Oil Comple: मध्य पूर्व में जारी भीषण तनाव के बीच इजरायल ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए उसके सबसे बड़े ऊर्जा केंद्र 'साउथ पार्स' पर विध्वंसक हमला किया है। यह हमला सोमवार (6 अप्रैल) को उस समय हुआ जब अमेरिका द्वारा दी गई सीजफायर की समयसीमा समाप्त होने में महज कुछ घंटे शेष थे। इस हमले के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और कूटनीतिक हलकों में भविष्य के खतरों को लेकर चिंता गहरा गई है।

ट्रंप की धमकी और इजरायल की स्ट्राइक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को मंगलवार (7 अप्रैल) तक का अल्टीमेटम दिया था। ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से चेतावनी दी थी कि यदि तय समय तक समझौता नहीं होता है तो वह ईरान में 'सब कुछ उड़ा देंगे'। हालांकि, इस डेडलाइन के खत्म होने से पहले ही इजरायली लड़ाकू विमानों ने दक्षिण ईरान के असलुयेह में स्थित साउथ पार्स पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ बमबारी शुरू कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक, हमले के दौरान प्लांट परिसर में एक के बाद एक कई भीषण विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं।

सीजफायर पर क्यों नहीं बन सकी बात?

युद्ध को रोकने के लिए मिस्र, तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों द्वारा मध्यस्थता की अंतिम कोशिशें की जा रही थीं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इस समझौते के तहत पहले एक अस्थायी युद्धविराम का प्रस्ताव रखा गया था लेकिन ईरान इससे सहमत नहीं हुआ। ईरान की मांग है कि पूर्ण युद्धविराम की घोषणा की जाए और बातचीत उसकी अपनी शर्तों पर हो। गौरतलब है कि अमेरिका की ओर से इन वार्ताओं का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं।

साउथ पार्स क्यों है ईरान के लिए इतना अहम?

साउथ पार्स गैसफील्ड को ईरान का सबसे महत्वपूर्ण तेल और ऊर्जा संयंत्र माना जाता है। यह दुनिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस फील्ड है, जो फारस की खाड़ी के नीचे स्थित है। आंकड़ों के अनुसार, यहां 1800 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस का भंडार है, जो पूरी दुनिया की 13 साल की जरूरतों को पूरा कर सकता है।

ईरान के कुल गैस उत्पादन का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा इसी फील्ड से प्राप्त होता है। इससे पहले मार्च 2026 और जून 2025 में भी इजरायल ने यहां हमला किया था लेकिन तब कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ था।

ईरान की जवाबी कार्रवाई

इजरायल के इस हमले के बाद ईरान ने बेहद सख्त तेवर अपना लिए हैं। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह जवाबी कार्रवाई में क्षेत्र के सभी गैस और तेल ठिकानों को निशाना बनाएगा। ईरान के निशाने पर इस बार केवल इजरायल नहीं बल्कि कुवैत, सऊदी अरब और यूएई के तेल ठिकाने भी हैं। इससे पहले भी साउथ पार्स पर हमले के जवाब में ईरान ने कतर पर हमला किया था। जिसने पड़ोसी अरब देशों की चिंता बढ़ा दी है।

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