नेतन्याहू, ट्रंप और मोजतबा खामेनेई, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

क्या ईरान युद्ध में फंस गए ट्रंप और नेतन्याहू? इंटेलिजेंस रिपोर्ट में बड़ा खुलासा; एक साल तक खिंच सकती है जंग

Israel Iran War:  इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने पीएम नेतन्याहू को आगाह किया है कि ईरान में 'रेजीम चेंज' कोई आसान काम नहीं है। नई रिपोर्ट के अनुसार, यह युद्ध एक साल तक खिंच सकता है।

अमन उपाध्याय

Netanyahu Iran War Plan: मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य संघर्ष को लेकर एक चौंकाने वाली इंटेलिजेंस रिपोर्ट सामने आई है, जिसने इजरायल और अमेरिका की शुरुआती उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन कोई हफ्तों या महीनों का काम नहीं है बल्कि इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम एक साल का समय लग सकता है। इस खुलासे के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की युद्ध रणनीति पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

मोसाद चीफ की पहले से थी चेतावनी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया ने युद्ध की शुरुआत से पहले ही प्रधानमंत्री नेतन्याहू को इस लंबी लड़ाई के प्रति सचेत कर दिया था। बार्निया ने इजरायली कैबिनेट के समक्ष स्पष्ट किया था कि ईरान में शासन बदलना संभव तो है लेकिन इसके लिए एक लंबी और जटिल प्रक्रिया से गुजरना होगा। उन्होंने आकलन दिया था कि यह सैन्य अभियान कुछ दिनों में खत्म होने वाला नहीं है बल्कि यह एक साल तक खिंच सकता है। हालांकि, उस समय सरकार की ओर से जनता के सामने जो तस्वीर पेश की गई, उसमें ईरान की सत्ता के जल्द गिरने के दावे किए गए थे।

ईरान कमजोर जरूर पर नियंत्रण बरकरार

युद्ध शुरू हुए तीन हफ्ते बीत चुके हैं लेकिन जमीनी हकीकत मोसाद की चेतावनी की पुष्टि कर रही है। अमेरिकी इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड ने भी हाल ही में इस पर अपनी राय साझा की है। गबार्ड के अनुसार, अमेरिकी और इजरायली हमलों के कारण ईरान की सरकार निश्चित रूप से कमजोर हुई है, लेकिन वह अभी भी पूरी तरह से सत्ता पर काबिज है और व्यवस्था उनके नियंत्रण में है। खुद पीएम नेतन्याहू ने भी अब यह स्वीकार किया है कि वे हालात बदलने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन सरकार के गिरने की कोई निश्चितता नहीं है।

सत्ता परिवर्तन की कठिन शर्तें

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में 'रेजीम चेंज' के लिए केवल बमबारी काफी नहीं है। इसके लिए शीर्ष नेतृत्व को पूरी तरह पंगु बनाना, सरकारी संस्थाओं को नष्ट करना और आम जनता के बीच व्यापक विद्रोह को भड़काना जरूरी है  जो कि एक बेहद धीमी प्रक्रिया है। इस लंबी खिंचती जंग ने अब इजरायल और अमेरिका के सामने आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

क्या लंबी जंग के लिए तैयार है अमेरिका?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रंप प्रशासन और इजरायल एक साल तक चलने वाले इस भारी-भरकम सैन्य खर्च और आर्थिक नुकसान को झेलने के लिए तैयार हैं? लंबी जंग का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर पड़ना तय है, जिससे पहले ही ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट देखी जा रही है। यदि यह संघर्ष मोसाद की भविष्यवाणी के अनुसार एक साल तक चला, तो इसके परिणाम न केवल ईरान, बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी हो सकते हैं।

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