ईरान-अमेरिका की जंग में यूक्रेन पर संकट, फोटो (सो. सोशल मीडिया)  
विदेश

ईरान-अमेरिका जंग में 'पैट्रियट' का संकट, यूक्रेन की सुरक्षा पर मंडराया खतरा; क्या रूस को मिलेगा बड़ा मौका?

US Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध में पैट्रियट एयर डिफेंस मिसाइलों की भारी खपत हो रही है। महज 3 दिनों में 800 मिसाइलों के इस्तेमाल से यूक्रेन के लिए हथियारों का भंडार कम हो गया है।

अमन उपाध्याय

Patriot Missile Shortage Ukraine: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध अब एक रणनीतिक शतरंज के खेल में बदल गया है, जहां एक मोहरे की चाल दूसरे मोर्चे पर असर डाल रही है। इस युद्ध का सीधा असर यूरोप में जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष पर पड़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरानी ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए बड़ी संख्या में 'पैट्रियट' एयर डिफेंस मिसाइलें खर्च कर रहे हैं जिससे यूक्रेन को मिलने वाली हथियार आपूर्ति पर संकट मंडराने लगा है।

हैरान करने वाले आंकड़े

यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, रूस के खिलाफ युद्ध के करीब 1460 दिनों में पैट्रियट सिस्टम से लगभग 600 इंटरसेप्टर मिसाइलें दागी गईं। इसके विपरीत, ईरान के हमलों को रोकने के लिए सिर्फ 3 दिनों के भीतर ही करीब 800 इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल कर ली गई हैं। ईरान ने अब तक 1,475 ड्रोन, 262 बैलिस्टिक मिसाइल और 8 क्रूज मिसाइलें दागी हैं, जिन्हें गिराने के लिए अमेरिका को अपने पैट्रियट और THAAD सिस्टम का व्यापक उपयोग करना पड़ा है।

यूक्रेन की रक्षा क्षमता पर सवाल

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी मिसाइलों की इस कमी को लेकर गहरी चिंता जताई है। यूरोपीय अधिकारियों को डर है कि यदि पैट्रियट मिसाइलों का भंडार इसी तरह खाली होता रहा तो यूक्रेन के शहरों और ऊर्जा ढांचे पर रूस को बड़े हमले करने का सुनहरा मौका मिल जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका का ध्यान पूरी तरह मिडिल ईस्ट पर केंद्रित हो गया तो रूस पर बातचीत का दबाव कम हो जाएगा और वह युद्ध में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।

उत्पादन बढ़ाने की चुनौती

मिसाइलों की कमी को देखते हुए अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने पैट्रियट मिसाइलों के उत्पादन को सालाना 600 से बढ़ाकर 2,000 करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन क्षमता को इस स्तर तक ले जाने में कई साल लग सकते हैं। तब तक, हथियारों की मांग और आपूर्ति के बीच यह बड़ा अंतर बना रहने की संभावना है जो यूक्रेन के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।

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