Iran Us Tension Trump Oil Pipeline Threat: मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की रूस यात्रा और वहां राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से संभावित मुलाकात की खबरों ने अमेरिका को नाराज कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान को सीधे तौर पर चेतावनी जारी की है जिसके बाद वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मच गई है।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि अब बातचीत का समय समाप्त हो रहा है। ट्रंप ने ईरान को केवल तीन दिन की मोहलत देते हुए कहा है कि अगर इस अवधि के भीतर कोई ठोस समझौता नहीं होता, तो ईरान को ऐसे परिणाम भुगतने होंगे जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होगी। ट्रंप ने विशेष रूप से ईरान की तेल पाइपलाइनों को खत्म करने की चेतावनी दी है, जिससे ईरान का तेल निर्यात पूरी तरह ठप हो सकता है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अब कूटनीतिक औपचारिकताएं नहीं होंगी और वह सीधे फोन पर बात करेंगे।
रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने पर विचार कर सकता है। इसके अलावा, सीजफायर को बढ़ाने और जंग को खत्म करने की भी बात इसमें कही गई है। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि तेहरान अभी परमाणु मुद्दे को लेकर कोई बात करने के मूड में नहीं है। उसका साफ और सीधा यही कहना है कि पहले अमेरिका पहले समुद्री रास्ते को खोले और जो भी पाबंदियां लगाई गई हैं वो खत्म कि जाए तभी आगे कोई बातचीत होगी।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची लगातार कई देशों की यात्रा कर रहे हैं। सबसे पहले वो पाकिस्तान गए उसके बाद वो ओमान की यात्रा पर गए। फिलहाल वो अभी रूस पहुंचे हैं जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हो सकती है। इसमें यह भी बताया जा रहा है कि ईरान ने अमेरिका को संदेश भी भेजा है जिसमें होर्मुज और परमाणु मुद्दे जैसे अहम मामलो की बात का जिक्र है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी से शुरू इस जंग से दुनिया में एक बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। जिसमें सबसे मुख्य संकट उर्जा, गैस और तेल है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के कारण कई देशों की जहाजे अभी भी फंसी हुई है।
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जिसकी वजह से तेल गैस की समस्या पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश जैसे देशों में बड़े स्तर पर देखने को मिल रहा है। भारत की बात की जाए तो, यहां पर अभी उतनी परेशानी देखने को नहीं मिली है। हालांकि ऐसी ही स्थिति बनी रही तो भारत में भी इसका प्रभाव जल्द देखने को मिल सकता है।