ईरान ने ट्रंप की बातचीत के दावे को खारिज किया (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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झूठ बोल रहे हैं ट्रंप! शांति वार्ता के दावों को ईरान ने किया खारिज, कहा- लक्ष्य हासिल होने तक जारी रहेंगे हमले

No Talk Between US-Iran: ट्रंप ने ईरान से बातचीत होने का दावा किया, लेकिन गालिबफ ने इसे खारिज कर दिया। इन विरोधाभासी बयानों से मध्य पूर्व में तनाव और अस्थिरता बढ़ने का खतरा है।

अक्षय साहू

Iran Rejects Trump Talk Claim: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि उनकी ईरान के साथ बातचीत हुई है और अमेरिका अगले पांच दिनों तक ईरान पर कोई हमला नहीं करेगा। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी, लेकिन ईरान की ओर से इसे तुरंत खारिज कर दिया गया।

ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने ट्रंप के दावे को पूरी तरह से ‘फेक न्यूज’ बताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी प्रकार की कोई बातचीत नहीं हुई है। गालिबफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरानी जनता अमेरिका और इजरायल जैसे “हमलावरों” के लिए कड़ी और निर्णायक सजा की मांग कर रही है।

लक्ष्य हासिल होने तक जारी रहेंगे हमले

गालिबफ ने यह भी कहा कि जब तक यह लक्ष्य हासिल नहीं हो जाता, तब तक ईरान के सभी अधिकारी अपने सर्वोच्च नेता और जनता के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। उन्होंने ट्रंप के दावे को लेकर स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान का अमेरिका के राष्ट्रपति से कोई संपर्क ही नहीं है। ईरान दावे को लेकर इसलिए भी मजबूती मिलती है क्योंकि ट्रंप के बयान के कुछ देर बाद ही इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान पर मिसाइल के हमला किया। गालिबफ ने एक अन्य पोस्ट में डोनाल्ड ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह के झूठे दावे वित्तीय और तेल बाजारों को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा हैं। उनके मुताबिक, अमेरिका इन बयानों के जरिए वैश्विक बाजारों में हेरफेर करने और मौजूदा जटिल परिस्थितियों से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है।

मिडिल ईस्ट और बढ़ सकता है तनाव

गौरतलब है कि हाल के दिनों में कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि गालिबफ अमेरिका के साथ संभावित बातचीत में शामिल हो सकते हैं। हालांकि अब उन्होंने स्वयं इन सभी अटकलों को खारिज कर दिया है। इससे यह संकेत मिलता है कि फिलहाल ईरान किसी भी तरह की कूटनीतिक बातचीत के मूड में नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विरोधाभासी बयानों से मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ सकता है। यदि स्थिति इसी तरह बनी रही, तो आने वाले दिनों में क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है और वैश्विक राजनीति में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

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