Islamabad Peace Talks Failed: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई लंबी बातचीत के बेनतीजा रहने के बाद ईरान की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी पक्ष ने कहा है कि अमेरिका ने बातचीत के दौरान अत्यधिक और कठोर शर्तें रखीं, जिन पर सहमति बन पाना संभव नहीं था।
ईरान ने संकेत दिया कि वार्ता में कुछ मुद्दों पर चर्चा जरूर हुई, लेकिन अमेरिकी रुख काफी सख्त रहा। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका की मांगें संतुलित नहीं थीं, जिसकी वजह से किसी समझौते तक पहुंचना मुश्किल हो गया।
इस बयान से साफ है कि दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी गहरे हैं। जहां एक ओर अमेरिका अपने रुख पर कायम है, वहीं ईरान भी अपनी शर्तों से पीछे हटने के मूड में नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में फिलहाल किसी डील की संभावना अनिश्चित बनी हुई है।
वार्ता किस मुद्दे पर टूट गई, इस पर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने बातचीत में इतनी ज्यादा शर्तें रख दीं कि किसी भी तरह का समझौता ढांचा (framework) बन ही नहीं सका। ईरान के अनुसार हॉर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु अधिकार और अन्य कई मुद्दों पर अमेरिकी मांगों के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई।
ईरान ने पहले ही 10 सूत्रीय शर्तें रखी थीं, जिनमें हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण को मान्यता देने और वहां से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट शुल्क वसूलने के अधिकार की मांग शामिल थी। इसके साथ ही उसने शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तहत यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को बनाए रखने पर जोर दिया था।
फ़ार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरानी प्रतिनिधिमंडल के करीबी सूत्रों का कहना है कि अमेरिका ने ऐसे मुद्दों पर भी मांगें रखीं, जिन्हें ईरान स्वीकार नहीं कर सकता था, और यही कारण रहा कि वार्ता विफल हो गई। सूत्रों ने दावा किया कि “अमेरिका ने बातचीत के ज़रिए वो सब हासिल करने की कोशिश की, जो उसे सैन्य तरीके से नहीं मिल सका।”
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वहीं अमेरिकी पक्ष का कहना है कि मुख्य मुद्दा परमाणु हथियारों को लेकर था। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान स्पष्ट और ठोस गारंटी दे कि वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही ऐसे रास्ते अपनाएगा जिनसे वह तेजी से परमाणु हथियार विकसित कर सके।