ईरान में फंसे भारतीयों की घर वापसी शुरू, खतरनाक हालात के बीच आर्मेनिया के रास्ते निकाले गए 312 मछुआरे

India Evacuates Citizens From Iran: इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर वार्ता शुरू हो गई है। इसी बीच भारत ने ईरान में फंसे 312 मछुआरों को सुरक्षित निकाला।
Repatriation of Indians Stranded in Iran Begins: 312 Fishermen Evacuated via Armenia Amidst Perilous Conditions
विदेश मंत्री, एस. जयशंकर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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India Evacuates Citizens From Iran 312 Fishermen: मध्य पूर्व में जारी भीषण तनाव के बीच वैश्विक कूटनीति का केंद्र अब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद बन गया है। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को अमेरिका और ईरान के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ऐतिहासिक शांति वार्ता (Peace Talks) के लिए आमने-सामने आए हैं। इस बेहद संवेदनशील माहौल के बीच भारत ने एक बड़ी मानवीय उपलब्धि हासिल करते हुए ईरान में फंसे अपने 312 नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।

भारत का सफल रेस्क्यू ऑपरेशन

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के खतरों को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने ईरान में फंसे भारतीयों को निकालने का अभियान तेज कर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जानकारी दी कि 312 भारतीय मछुआरों को सफलतापूर्वक आर्मेनिया के रास्ते भारत वापस लाया गया है। जयशंकर ने इस जटिल अभियान में सहयोग के लिए आर्मेनियाई सरकार और अपने समकक्ष अरारात मिर्जोयान का विशेष आभार व्यक्त किया। यह अभियान ऐसे समय में पूरा हुआ है जब ईरान के भीतर सुरक्षा स्थितियां और इंटरनेट सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं।

इस्लामाबाद में कूटनीति की मेज

शांति वार्ता के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) के नेतृत्व में एक शक्तिशाली दल इस्लामाबाद पहुंचा है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी जारेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ शामिल हैं। वहीं, ईरान का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अपनी टीम को '#Minab168' नाम दिया है जो 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमले में मारे गए 168 छात्रों की याद में रखा गया है।

शर्तें और भरोसे की चुनौती

वार्ता शुरू होने से पहले ही दोनों पक्षों ने अपनी कड़ी शर्तें स्पष्ट कर दी हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा है कि किसी भी समझौते के लिए ईरान का परमाणु मुक्त होना और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला रहना अनिवार्य है। दूसरी ओर, ईरानी नेता गालिबफ ने स्पष्ट किया कि ईरान 'सद्भावना' के साथ बातचीत के लिए आया है, लेकिन उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उनके अधिकारों को स्वीकार नहीं करता और पुराने वादों को पूरा नहीं करता, तब तक ठोस समझौता मुश्किल है।

क्षेत्र में हिंसा का साया

कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद जमीन पर हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। दक्षिणी लेबनान के नबातीह जिले में इजरायली हवाई हमले में तीन लोगों की मौत हो गई, जिससे लेबनान में मरने वालों का आंकड़ा 357 तक पहुंच गया है। वहीं, हिजबुल्ला ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए उत्तरी इजरायल के सीमावर्ती कस्बों पर ड्रोन और रॉकेट दागे हैं।

इजरायल और लेबनान के बीच भी 14 अप्रैल को एक अहम बैठक प्रस्तावित है, जिस पर दुनिया की निगाहें टिकी हैं। ईरान में पिछले 1,000 घंटों से अधिक समय से जारी इंटरनेट प्रतिबंध भी वहां की गंभीर आंतरिक स्थिति को बयां कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस्लामाबाद की यह मेज दुनिया को शांति का संदेश देती है या तनाव और बढ़ता है।

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