ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

ईरान का अमेरिका को कड़ा संदेश: 'सम्मान' के साथ चाहिए शांति, परमाणु अधिकारों पर झुकने को तैयार नहीं पेजेशकियन

Iran Pezeshkian Nuclear Rights: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बताया कि ईरान क्षेत्रीय स्थिरता चाहता है लेकिन अपने परमाणु अधिकारों से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिका की मांगों की आलोचना की है।

अमन उपाध्याय

Iran Pezeshkian Nuclear Rights US Talks:  ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तेहरान का मंशा साफ करते हुए कहा कि उनका देश चल रहे संघर्षों को 'सम्मान के साथ' खत्म करना चाहता है। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि किसी भी विदेशी शक्ति या देश के पास ईरान को उसके वैध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त परमाणु अधिकारों से वंचित करने का अधिकार नहीं है।

क्षेत्रीय शांति और आत्मरक्षा पर जोर

पेजेशकियन के अनुसार, ईरान की विदेश नीति का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना है न कि युद्ध का विस्तार करना। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान ने कभी भी किसी संघर्ष की शुरुआत नहीं की है और न ही उसकी योजना किसी दूसरे देश पर हमला करने की है। उन्होंने वैश्विक समुदाय को आश्वस्त किया कि ईरान केवल आत्मरक्षा के अपने कानूनी अधिकार का पालन कर रहा है। राष्ट्रपति ने विरोधियों पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने नागरिक बुनियादी ढांचे, स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बनाकर अपने लक्ष्यों को पाने में विफलता हासिल की है।

अमेरिका के मंशा की आलोचना

राष्ट्रपति पेजेशकियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर सीधे सवाल उठाए। ईरानी छात्र समाचार एजेंसी (ISNA) के हवाले से उन्होंने पूछा कि किस आधार पर वाशिंगटन ईरान की परमाणु गतिविधियों को प्रतिबंधित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रंप का कहना है कि ईरान अपने परमाणु अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकता लेकिन वे यह नहीं बताते कि किस अपराध के लिए? वे किसी राष्ट्र को उसके मौलिक अधिकारों से वंचित करने वाले कौन होते हैं?।

बातचीत को लेकर क्या हैं ईरान की शर्तें?

कूटनीतिक स्तर पर ईरान ने फिलहाल अमेरिका के साथ आमने-सामने की मेज पर बैठने से इनकार कर दिया है। ईरानी उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने स्पष्ट किया कि तेहरान अभी सीधी बातचीत के लिए तैयार नहीं है क्योंकि अमेरिका अभी भी अपनी 'अधिकतमवादी' मांगों पर अड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि ईरान अपना समृद्ध यूरेनियम किसी भी स्थिति में अमेरिका को नहीं सौंपेगा। खतीबजादेह ने इसे एक 'नॉन-स्टार्टर' मुद्दा बताया और कहा कि जब तक अमेरिका अपना अड़ियल रवैया नहीं छोड़ता तब तक कोई भी व्यक्तिगत बैठक संभव नहीं है।

क्या है लेबनान का मुद्दा?

ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को 'आर्थिक आतंकवाद' करार दिया है, जिसका उद्देश्य ईरानी जनता को राजनीतिक ढांचे के खिलाफ भड़काना है। उप विदेश मंत्री ने मांग की कि अमेरिका को सबसे पहले इन अवैध एकतरफा प्रतिबंधों से जुड़ी चिंताओं को दूर करना चाहिए। इसके अलावा, ईरान का रुख है कि किसी भी सीजफायर समझौते में लेबनान को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि Strait of Hormuz के लिए एक 'नया प्रोटोकॉल' तैयार किया जा रहा है लेकिन कूटनीतिक वार्ताओं के बीच यह रणनीतिक जलमार्ग नागरिक यातायात के लिए खुला रहेगा।

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