IAEA के खिलाफ भड़का ईरान, (डिजाइन फोटो)  
विदेश

हमारी 'जवाबी चोट' के लिए तैयार रहो! IAEA के खिलाफ भड़का ईरान, कड़ी कार्रवाई की दी धमकी

Tehran Nuclear Program: संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था IAEA के ताजा प्रस्ताव ने ईरान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच तनाव बढ़ा दिया है। ईरान ने इस प्रस्ताव को ईरान-विरोधी कहकर खारिज कर दिया।

अमन उपाध्याय

Iran IAEA Warning: ईरान और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बीच लंबे समय से जारी तनातनी एक बार फिर तेज हो गई है। IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा गुरुवार को पारित एक प्रस्ताव में ईरान से मांग की गई कि वह परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी गतिविधियों पर पूर्ण सहयोग करे और हथियार-ग्रेड यूरेनियम के अपने भंडार के बारे में सटीक और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराए। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके निरीक्षकों को ईरान के सभी परमाणु स्थलों पर पहुंच मिलनी चाहिए।

ईरान ने इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज करते हुए इसे ईरान-विरोधी बताया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने सरकारी समाचार एजेंसी इरना को दिए एक बयान में कहा कि तेहरान ने IAEA को एक पत्र भेजकर काहिरा में हुए निरीक्षण समझौते को समाप्त करने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान केवल इसी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रस्ताव के जवाब में अन्य गंभीर कार्रवाई भी कर सकता है।

राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप

बाघई ने IAEA पर अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के “राजनीतिक दबाव” में काम करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि प्रस्ताव में इस बात का कोई उल्लेख नहीं है कि ईरान ने निरीक्षण क्यों रोके जबकि जून में इज़राइल और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों के बाद ही तेहरान ने IAEA के साथ सहयोग निलंबित कर दिया था। इन हमलों में 1,100 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें कई सैन्य अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिक शामिल थे।

चेतावनी से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका

उल्लेखनीय है कि सितंबर की शुरुआत में काहिरा में हुई बैठक में IAEA महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने निरीक्षण फिर से शुरू करने पर सहमति जताई थी। लेकिन संयुक्त राष्ट्र द्वारा उसी महीने ‘स्नैपबैक’ तंत्र लागू करते हुए 2015 के परमाणु समझौते के तहत प्रतिबंध पुन: लागू कर दिए जाने से ईरान में नाराजगी बढ़ गई।

अब ईरान द्वारा समझौता रद्द करने और आगे कड़े कदम उठाने की चेतावनी से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि तेहरान यूरेनियम संवर्धन की गति बढ़ाकर पश्चिमी देशों पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। वहीं IAEA के प्रस्ताव ने दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली की संभावनाओं को और कमजोर कर दिया है।

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