सांकेतिक फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

जंग के बीच तेहरान की बड़ी चाल! हमलों के बावजूद ईरान ने ‘होर्मुज’ में इस देश को दी खुली छूट, जानें क्या है वजह

Iran Allows Turkey Ships: अमेरिका और इजरायल के साथ जारी भीषण जंग के बीच ईरान ने तुर्की के तेल जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने की विशेष अनुमति दी है। जानें इसके पीछे की असली वजह।

अमन उपाध्याय

Iran Allows Turkey Ships Hormuz Strait: मध्य पूर्व में जारी विनाशकारी युद्ध के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक तरफ ईरान, तुर्की में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है वहीं दूसरी ओर उसने तुर्की के तेल जहाजों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz पार करने की विशेष रियायत दी है। यह विरोधाभासी कदम वैश्विक कूटनीति के गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

'ओशन थंडर' ने सुरक्षित पार किया होर्मुज

तुर्की के परिवहन और बुनियादी ढांचा मंत्री अब्दुलकादिर उरालोग्लू ने बताया है कि 'ओशन थंडर' नामक एक तुर्की तेल जहाज ने सुरक्षित रूप से होर्मुज को पार कर लिया है। यह जहाज इराक से मलेशिया के लिए कच्चा तेल लेकर जा रहा था। तुर्की के विदेश मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय के कारण इस मार्ग को सुगम बनाया जा सका। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक ईरान के नियंत्रण वाले इस समुद्री मार्ग को पार करने वाला यह तीसरा तुर्की जहाज है।

12 जहाज अभी भी कतार में

मंत्री उरालोग्लू के अनुसार, वर्तमान में तुर्की के स्वामित्व वाले लगभग 12 जहाज अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास इंतजार कर रहे हैं। इनमें से 8 जहाजों ने आधिकारिक तौर पर रास्ता पार करने की अनुमति मांगी है। इन जहाजों पर कुल 156 क्रू सदस्य सवार हैं जिनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुर्की का परिवहन मंत्रालय और विदेश मंत्रालय लगातार ईरानी अधिकारियों के संपर्क में हैं।

आखिर तुर्की को छूट क्यों?

ईरान का यह कदम काफी पेचीदा है क्योंकि वह एक तरफ तुर्की में स्थित इन्सर्टिक एयर बेस और कुरेसिक रडार स्टेशन जैसे अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है। ईरान ने अब तक कम से कम चार बार बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं जिन्हें NATO के डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया।

ईरान का कहना है कि वह तुर्की को निशाना नहीं बना रहा बल्कि उसके निशाने पर केवल अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं। इसके पीछे एक बड़ी वजह तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन का रुख भी माना जा रहा है जिन्होंने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को 'अवैध' करार दिया है और इजरायल को इस पूरी जंग का मुख्य जिम्मेदार ठहराया है।

खाड़ी देशों पर हमले

यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया। इस भीषण जंग में अब तक 1,340 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल हैं। जवाब में ईरान ने इजरायल के साथ-साथ जॉर्डन, इराक और उन खाड़ी देशों पर भी हमले किए हैं जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। फिलहाल पूरा क्षेत्र हाई अलर्ट पर है और समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

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