अंतरराष्ट्रीय समान वेतन दिवस (सोर्स- सोशल मीडिया)
विदेश

अंतरराष्ट्रीय समान वेतन दिवस: पुरुषों से ज्यादा मेहनत, फिर भी महिलाओं को कम सैलरी, आखिर कब खत्म होगा अंतर?

Equal Pay Day: दुनियाभर में 18 सितंबर को मनाए जाने वाले Equal Pay Day का मुख्य उद्देश्य महिलाओं व पुरुषों के बीच वेतन असमानता खत्म करना और समान काम के लिए समान वेतन की मांग को मजबूत करना है।

प्रिया सिंह

International Equal Pay Day Report: दुनियाभर में महिला कामगारों के अधिकारों और समान वेतन की वकालत करने के लिए हर साल 18 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय समान वेतन दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रतिबद्धता के तहत यह दिवस वर्कप्लेस पर महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ होने वाले हर तरह के भेदभाव को समाप्त करने का संदेश देता है।

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताती हैं कि वैश्विक स्तर पर आज भी पुरुषों की तुलना में महिलाओं को काफी कम वेतन मिलता है। इसी ऐतिहासिक विषमता और आर्थिक असमानता को दूर करने तथा महिलाओं को रोजगार के समान अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से यह दिन पूरी दुनिया में मनाया जाता है।

वैश्विक स्तर पर लैंगिक वेतन अंतर और संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े

दुनियाभर में पुरुषों की तुलना में महिलाएं आज भी औसतन लगभग 20 प्रतिशत कम कमाती हैं। यह केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि उन लाखों महिलाओं का जीवन संघर्ष है जो अर्थव्यवस्था को सहारा देती हैं।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार पुरुष कर्मचारियों द्वारा कमाए गए हर एक डॉलर के मुकाबले महिलाएं औसतन 78 सेंट ही कमा पाती हैं। शैक्षणिक योग्यता होने के बावजूद महिलाओं को अक्सर कम वेतन वाले क्षेत्रों में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसके विपरीत पुरुष अधिक वेतन देने वाले उद्योगों और निर्णय लेने वाले उच्च पदों पर अधिक संख्या में मौजूद हैं।

वेतन असमानता समाप्त होने में लगेंगे 257 वर्ष और इपिक की भूमिका

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन यानी ILO ने वर्ष 2024 में एक महत्वपूर्ण अनुमान जारी किया था। ILO के अनुसार वर्तमान गति से वैश्विक लैंगिक वेतन अंतर को पूरी तरह समाप्त करने में 257 वर्ष का समय लगेगा। इस विशाल अंतर को कम करने के लिए समान वेतन अंतरराष्ट्रीय गठबंधन यानी इपिक लगातार प्रयासरत है।

इपिक का मुख्य लक्ष्य विश्व स्तर पर महिलाओं और पुरुषों के लिए समान मूल्य के काम हेतु समान वेतन सुनिश्चित करना है। वेतन में यह असमानता न केवल मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन है बल्कि एक गंभीर आर्थिक चिंता का विषय भी है।

संयुक्त राष्ट्र चार्टर और मानवाधिकार घोषणा पत्र का ऐतिहासिक आधार

महिलाओं के अधिकारों के प्रति संयुक्त राष्ट्र का समर्थन उसके संस्थापक चार्टर से ही जुड़ा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 1 में बिना किसी लिंग भेद के सभी के मानवाधिकारों के सम्मान की बात कही गई है। अपने गठन के प्रथम वर्ष में ही आर्थिक एवं सामाजिक परिषद ने महिलाओं की स्थिति पर विशेष आयोग की स्थापना की थी।

इस आयोग की शुरुआती उपलब्धियों में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के मसौदे में लैंगिक रूप से तटस्थ भाषा शामिल कराना था। लैंगिक समानता स्थापित होने से न केवल शांतिपूर्ण समाजों का निर्माण होता है बल्कि सतत विकास को भी गति मिलती है।

18 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय समान वेतन दिवस घोषित करने का फैसला

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 15 नवंबर 2019 को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित कर 18 सितंबर को यह दिवस घोषित किया था। इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को दुनिया भर के 105 सदस्य देशों ने मिलकर सह प्रायोजित किया था। इसके पश्चात पहली बार अंतरराष्ट्रीय समान वेतन दिवस वर्ष 2020 में आधिकारिक रूप से मनाया गया था।

इस पहल में श्रमिक संगठनों, नियोक्ताओं और विभिन्न व्यावसायिक निकायों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। समान मूल्य के काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित करने की यह वैश्विक लड़ाई महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता की नींव है।

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