सांकेतिक तस्वीर, (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

इंडोनेशिया में सोशल पर लगा बैन, 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बंद हुए प्लेटफॉर्म्स

Indonesia Social Media Ban: ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर अब इंडोनेशिया ने भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया है। 

अमन उपाध्याय

Why Indonesia Banned Social Media: इंडोनेशिया ने शनिवार, 28 मार्च 2026 से देश के करीब 7 करोड़ बच्चों के लिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग एक्सेस को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकार का यह फैसला उन बच्चों पर लागू होगा जिनकी उम्र 16 साल से कम है। दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश इंडोनेशिया ने इस महीने की शुरुआत में ही ऑनलाइन पोर्नोग्राफी, साइबरबुलिंग और इंटरनेट की लत जैसे गंभीर खतरों का हवाला देते हुए इस प्रतिबंध की घोषणा की थी।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सख्त चेतावनी

सूचना मंत्री मेउत्या हफीद ने शुक्रवार देर रात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि तकनीकी कंपनियों के लिए 'समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है।' उन्होंने बताया कि माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म एक्स और बिगो लाइव ने नए नियमों का पालन करना शुरू कर दिया है और अपने सिस्टम में न्यूनतम यूजर आयु को अपडेट कर दिया है। वहीं, लोकप्रिय वीडियो ऐप टिकटॉक ने भी मंत्रालय के साथ परामर्श कर 16 साल से कम उम्र के अकाउंट्स के खिलाफ सही कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई है। मंत्री ने अन्य सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को चेतावनी दी है कि वे तुरंत अपने प्रोडक्ट्स और सर्विसेज को स्थानीय कानूनों के अनुरूप ढालें।

वैश्विक स्तर पर बढ़ता दबाव

इंडोनेशिया का यह कदम ऑस्ट्रेलिया द्वारा दिसंबर में लागू की गई इसी तरह की नीति से प्रेरित है। यह दर्शाता है कि दुनिया भर की सरकारें बच्चों पर सोशल मीडिया के संभावित दुष्प्रभावों को लेकर अत्यधिक चिंतित हैं। हाल ही में, ब्रिटेन की संसद के ऊपरी सदन ने भी बच्चों पर सोशल मीडिया बैन लगाने के पक्ष में मतदान किया है जिससे वहां की सरकार पर भी ऐसा ही कानून बनाने का दबाव बढ़ गया है।

कंपनियों पर भारी जुर्माना

सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करने का एक बड़ा उदाहरण हाल ही में अमेरिका में देखने को मिला। लॉस एंजिल्स की एक जूरी ने मेटा और यूट्यूब को उनके 'नशे की लत लगाने वाले डिजाइन' के जरिए एक युवती को मानसिक और शारीरिक नुकसान पहुँचाने का दोषी पाया। जूरी ने दोनों दिग्गज कंपनियों को कुल 6 मिलियन डॉलर (लगभग 50 करोड़ रुपये) का हर्जाना देने का आदेश दिया है। इंडोनेशिया का यह सख्त कानून इसी वैश्विक कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।

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