रघु पुरी, यूएन में भारत के प्रतिनिधि सोर्स- (@IndiaUNNewYork)
विदेश

आतंकवाद को लेकर भारत की टो टूक! UN के रिपोर्टर को जमकर सुनाया, रिपोर्ट को पूर्वाग्रह से ग्रसित बताया

IFS Raghu Puri On Terrorism: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद को लेकर एक बार फिर सख्त टिप्पणी की है। भारत ने आतंवाद पर तैयार यूएन के रिपोर्टर द्वारा रिपोर्ट को पूर्वाग्रह से ग्रसित बताया है।

नितिन कुमार राय

Highlights

  • भारत ने आतंकवाद को लेकर यूएन में कड़ी टिप्पणी की

  • यूएन के रिपोर्टर की रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है

  • यूएन रिपोर्टर को भारत ने पूर्वाग्रह से ग्रसित बताया

  • रिपोर्ट को लेकर भारत ने चिंता भी व्यक्त की है

Indian Diplomate Critics UN Report: भारत ने एक बार फिर यूनाइटेड नेशन में आतंकवाद को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। बुधवार को आतंकवाद विरोधी रिपोर्ट में पक्षपात के लिए संयुक्त राष्ट्र के रिपोर्टरों की कड़ी आलोचना की और निष्पक्षता के उच्च मानकों के पालन करने की मांग की। संयुक्त राष्ट्र के रिपोर्टर बेन साउल ने अपनी रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम को आतंकवादी संबंधों वाले भारत स्थित डी-कंपनी आपराधिक गिरोह का नेता बताया था।

इस पर आपत्ति जताते हुए भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि हम आतंकवाद विरोधी रिपोर्टरों द्वारा तथ्यात्मक त्रुटियों वाली रिपोर्ट जारी करने और इसके लिए जवाबदेह न ठहराए जाने की अस्वीकार्य स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं। यह सदस्य देशों के सामने एक ऐसी स्थिति प्रस्तुत करता है, जो इस संगठन के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है, जो वैधता की चुनौतियों का सामना कर रहा है।

रिपोर्ट को लेकर चिंता व्यक्त की

पुरी ने इस बात पर जोर दिया कि दाऊद एक वांछित अपराधी था और पाकिस्तान में रहता था, एक ऐसा देश जहां ओसामा बिन लादेन को पकड़ा गया था। रिपोर्ट में उल्लेख है कि 2003 में सुरक्षा परिषद ने एक आपराधिक समूह, डी-कंपनी के नेता को अल-कायदा से संबंध होने के कारण सूचीबद्ध किया था। इस बात को अलग से पढ़ने पर वास्तविकता से बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आती है।

यह संगठन और इसका सूचीबद्ध नेता दाऊद इब्राहिम 1993 से ही भारत में आतंकी हमलों के लिए वांछित है। यह बात 1267 प्रतिबंधों के तहत सूचीबद्ध किए जाने के कारणों के सारांश में स्पष्ट रूप से लिखी गई है। इस तथ्य का उल्लेख न करना खेदजनक है, और विशेष अधिकार प्राप्त अधिकारियों की यह अक्षमता इस संगठन को भारी नुकसान पहुंचाती है।

पूर्वाग्रह पर टिप्पणी करते हुए आलोचना की

पुरी ने स्पष्ट करते हुए कहा कि यह व्यक्ति 2003 में सूचीबद्ध किए जाने से बहुत पहले ही भारत से भाग गया था, और इसी दौरान, हमारे देश के बाहर से, उसे अल-कायदा और ओसामा बिन लादेन से संबंध होने के कारण सूचीबद्ध किया गया था। आज तक, वह मेरे देश में एक वांछित अपराधी है, और संयुक्त राष्ट्र की सूची के अनुसार, वह उसी देश में रहता है जहां ओसामा बिन लादेन को पकड़ा गया और मार गिराया गया था। भारत ने रिपोर्ट में व्याप्त पूर्वाग्रह की भी आलोचना करते हुए कहा कि मानवाधिकार ढांचे के आधार पर आतंकवाद के अपराधियों का न्याय नहीं किया जा सकता।

PoK को लेकर भारत ने रखा स्टैंड

भारतीय राजनयिक ने कहा कि ऐसा लगता है कि आतंकवाद के प्रायोजकों के लिए मानवाधिकारों और आतंकवाद-विरोधी ढांचे का इस्तेमाल अपने कुकर्मों को उचित ठहराने का एक चलन बन गया है। मानवाधिकार ढांचा आतंकवाद के अपराधियों और कट्टरता एवं उग्रवाद फैलाने वालों का सहारा नहीं बन सकता। आतंकवाद को कभी भी उचित नहीं ठहराया जा सकता। पुरी ने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल द्वारा जम्मू और कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताने वाली टिप्पणी की भी निंदा की।

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