ब्रिक्स समिट 2024 
विदेश

पाकिस्तान का करीबी होना तुर्किये को पड़ा भारी, भारत ने BRICS में रोकी एंट्री

भारत ने BRICS में तुर्किये की एंट्री पर रोक लगा दी है। ये दावा एक जर्मन अखबार बिल्ड ने अपनी रिपोर्ट की। कहना है कि भारत की वजह से तुर्किये कीब्रिक्स की सदस्यता नहीं मिल पाई। इसके मुताबिक तुर्किये ने समूह सदस्य बनने के लिए आवेदन किया था। लेकिन भारत की वजह से इसे खारिज कर दिया गया।

साक्षी सिंह

नई दिल्ली: भारत ने BRICS में तुर्किये की एंट्री पर रोक लगा दी है। ये दावा एक जर्मन अखबार बिल्ड ने अपनी रिपोर्ट की। कहना है कि भारत की वजह से तुर्किये कीब्रिक्स की सदस्यता नहीं मिल पाई। इसके मुताबिक तुर्किये ने समूह सदस्य बनने के लिए आवेदन किया था। लेकिन भारत की वजह से इसे खारिज कर दिया गया।

भारत ने क्यों किया खारिज

दरअसल, तुर्किये का पाकिस्तान के साथ करीबी संबंध हैं। कश्मीर मुद्दे पर वो कई बार भारत के खिलाफ बयान भी दे चुका है। हाल ही में रूस के कजान में आयोजित 16वें ब्रिक्स समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बयान में कहा था कि संगठन की योजनाएं संस्थापक देशों की सर्वसम्मति से बननी चाहिए।

संगठन के कार्य क्षमता पर न पड़े असर

हालांकि कयास ये लगाया जा रहा है कि पीएम मोदी के इस बयान के बाद से भारत के विरोध की वजह तुर्किये को ब्रिक्स की सदस्यता नहीं मिल पाई। ब्रिक्स समिट के दौरान अपने भाषण में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने भी कहा कि नए देशों को शामिल किए जाने से पहले ये ध्यान रखा जाएगा कि इससे समूह की कार्य क्षमता पर कोई असर न पड़े। इसकी वजह से भी नए आवेदनों को टाल दिया गया।

तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन

चार देश इस साल समूह के सदस्य बने

हालांकि तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने 24 अक्टूबर को आयोजित ब्रिक्स प्लस की समिट में हिस्सा लिया था। इस के साल शुरुआत में ब्रिक्स में चार नए देश इथियोपिया, ईरान, मिस्र और UAE जुड़े थे। जनवरी में ये चारों देश इस साल शिखर सम्मलेन में सदस्य के रूप में शामिल हुए थे। इस अब ब्रिक्स समूह की सदस्यों की संख्या 9 हो गई है।

24 देशों के नेता ब्रिक्स समिट में लिया था हिस्सा

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा कजान में ब्रिक्स सदस्य देशों के अपने समकक्षों के साथ बैठक कर सकते हैं। इसके आलावा आमंत्रित नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने की भी उम्मीद है। रूसी राष्ट्रपति के सहायक यूरी उशाकोव के मुताबिक, कजान में आयोजित ब्रिक्स समिट में 24 देशों के नेता और कुल 32 देशों के प्रतिनिधिमंडल भाग लेंगे। इस तरह रूस में आयोजित अब तक का यह सबसे बड़ा विदेश नीति का कार्यक्रम बन जाएगा।

तस्वीर में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

BRICS समिट के बारे में

शुरूआत में ब्रिक्स (BRICS) पांच देशों वाला समूह था। ये सिर्फ ब्राजील, रूस, इंडिया, चीन और साउथ अफ्रीका वाले देश का समूह था। इसके बाद इसी साल जनवरी में चार और देश सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया और मिस्र समूह में शामिल हुए। अब समूह सदस्य की संख्या 5 से 9 हो चुकी है।

BRICS समूह गठन का उद्देश्य क्या है

ब्रिक्स समूह से पहले ये ब्रिक समूह था। साल 2006 ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने मिलकर ब्रिक समूह बनाया। 2010 में दक्षिण अफ़्रीका भी इसमें शामिल हो गया और यह ब्रिक्स बन गया। इस समूह की स्थापना विश्व के सबसे महत्वपूर्ण विकासशील देशों को एक साथ लाने और उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी यूरोप के धनी देशों की राजनीतिक और आर्थिक शक्ति को चुनौती देने के लिए की गई थी।

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