प्रतीकात्मक फोटो। सोर्स: गूगल AI
विदेश

चीन-पाकिस्तान के पुरुष भारतीय पुरुषों से लंबे क्यों हैं? रिसर्च में सामने आई ये वजह

Male Height Comparison: लंबाई के मामले में भारत अपने पड़ोसी देशों से पीछे क्यों है? क्या इसकी वजह खानपान, आर्थिक विकास या स्वास्थ्य सुविधाएं हैं? जानें रिसर्च में सामने आए अंतर के पीछे की पूरी कहानी।

अमन कुमार पाण्डेय

Highlights:

  • चीन के युवा भारतीयों से लंबे क्यों हैं? इसके पीछे का कारण 

  • भारत और पाकिस्तान के युवाओं की तुलना। 

India Pakistan China Average Male Height Comparison: भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच आर्थिक विकास से लेकर खानपान तक कई मामलों में तुलना होती है। लेकिन जब बात लोगों की औसत लंबाई की आती है तो चीन और पाकिस्तान के पुरुष भारतीयों से आगे नजर आते हैं। एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के मुताबिक, 19 साल के चीनी लड़कों की औसत लंबाई 175.7 सेंटीमीटर है, जबकि पाकिस्तान में यह 167.3 सेंटीमीटर और भारत में 166.5 सेंटीमीटर है। यानी चीनी युवा भारतीयों से औसतन 9.2 सेंटीमीटर और पाकिस्तानी युवा 0.8 सेंटीमीटर लंबे हैं।

यह आंकड़े मेडिकल जर्नल द लैंसेट में 2020 में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन से लिए गए हैं। इसमें 1985 से 2019 के बीच 200 देशों और क्षेत्रों के 6.5 करोड़ लोगों पर हुए 2,181 अध्ययनों का विश्लेषण किया गया था। इसमें 19 साल के युवाओं की औसत लंबाई को आधार बनाया गया। 

चीन में लंबाई बढ़ने की क्या रही वजह?

चीन में पिछले कुछ दशकों में आर्थिक विकास के साथ खानपान और स्वास्थ्य सुविधाओं में भी सुधार हुआ है। बच्चों को बेहतर पोषण, प्रोटीनयुक्त भोजन, साफ पानी और स्वास्थ्य सेवाएं मिलने से उनके शारीरिक विकास को मदद मिली। लैंसेट की रिसर्च के मुताबिक, 1985 से 2019 के बीच चीन के 19 वर्षीय लड़कों की औसत लंबाई में करीब 8 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई।

क्या पाकिस्तान में भारतीयों से बेहतर खाना मिलता है?

पाकिस्तान के पुरुषों की औसत लंबाई भारतीयों से थोड़ी अधिक होने का मतलब यह नहीं है कि वहां लोगों को बेहतर खाना मिलता है। पाकिस्तान में भी कुपोषण एक गंभीर समस्या है। UNICEF के आंकड़ों के मुताबिक, वहां पांच साल से कम उम्र के करीब 40 प्रतिशत बच्चे स्टंटिंग यानी उम्र के हिसाब से कम लंबाई की समस्या से प्रभावित हैं।

भारत में भी बच्चों के बीच कुपोषण और स्टंटिंग की चुनौती बनी हुई है। ऐसे में दोनों देशों की औसत लंबाई में 0.8 सेंटीमीटर का अंतर केवल खानपान के आधार पर नहीं समझा जा सकता। आनुवंशिकता, गर्भावस्था के दौरान मां का पोषण, बचपन में मिलने वाला भोजन, संक्रमण और स्वास्थ्य सुविधाएं भी इसमें भूमिका निभाते हैं।

भारत और पाकिस्तान में कुपोषण अब भी चुनौती

पाकिस्तान में पांच साल से कम उम्र के करीब 40 प्रतिशत बच्चे स्टंटिंग से प्रभावित हैं। संयुक्त राष्ट्र की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, वहां लगभग एक करोड़ बच्चे उम्र के हिसाब से कम लंबाई की समस्या से जूझ रहे हैं। 

वहीं, भारत के NFHS-5 (2019-21) के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के 35.5 प्रतिशत बच्चे स्टंटिंग से प्रभावित थे। भारत के NFHS-5 और पाकिस्तान के आंकड़े अलग-अलग सर्वेक्षणों पर आधारित हैं, इसलिए इनकी सीधी तुलना सावधानी से करनी चाहिए। 

दक्षिण कोरिया की महिलाओं की लंबाई में 20 सेंटीमीटर का उछाल

दक्षिण कोरिया इसका एक दिलचस्प उदाहरण है। 2016 में जर्नल eLife में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, 1914 से 2014 के बीच वहां की महिलाओं की औसत लंबाई में 20.2 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई। इसके पीछे बेहतर पोषण, आर्थिक विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार जैसे कारक माने गए। 

इससे साफ है कि लोगों की लंबाई केवल आनुवंशिकता से तय नहीं होती। बचपन में मिलने वाला पोषण, मां की सेहत, साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुविधाएं भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं। हालांकि, भारत और पाकिस्तान के बीच महज 0.8 सेंटीमीटर का अंतर है, इसलिए इसे खानपान की बेहतर स्थिति का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

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