सेंट्रल अमेरिका के लिए भारत की नई पहल, फोटो (सो. आईएएनएस)  
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सेंट्रल अमेरिका के लिए भारत की नई पहल, जानें कैसे बदल सकती है उनकी दुनिया

Jaishankar on SICA Country: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सेंट्रल अमेरिकी देशों के साथ भारत की तकनीकी और व्यावसायिक विशेषज्ञता साझा करने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने डिजिटल भुगतान, आईटी, दवा उद्योग...

अमन उपाध्याय

India Central America Affiliate: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सेंट्रल अमेरिकी देशों के साथ भारत की विशेषज्ञता साझा करने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने डिजिटल भुगतान, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग करने की बात कही, ताकि इन देशों के साझा मुद्दों का बेहतर समाधान किया जा सके।

गुरुवार को न्यूयॉर्क में हुई पांचवीं भारत-सिका विदेश मंत्रियों की बैठक में जयशंकर ने कहा कि भारत और सेंट्रल अमेरिकी देश विकास, गरीबी उन्मूलन और जलवायु परिवर्तन जैसी समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यदि वे मिलकर काम करें, तो इन समस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह साझेदारी ठोस परिणाम ला सकती है और एक अधिक समावेशी, संतुलित और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में योगदान देगी। जयशंकर ने कहा कि भारत डिजिटल क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा तथा जलवायु कार्रवाई में विशेष रूप से आगे बढ़ने के लिए तैयार है।

भारत और सिका के बीच सहयोग हुआ मजबूत

सेंट्रल अमेरिकन इंटीग्रेशन सिस्टम (सिका), जिसमें आठ देश शामिल हैं, क्षेत्रीय आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने का काम करता है। भारत ने 2004 से इस समूह के साथ मंत्रिस्तरीय स्तर पर साझेदारी शुरू की थी। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत और सिका के बीच सहयोग काफी मजबूत हुआ है। दोनों पक्षों ने कोरोना महामारी के बाद की आर्थिक रिकवरी, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल परिवर्तन, विकास के लिए वित्तीय सहायता और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए महत्वपूर्ण प्रगति की है।

परंपरागत रूप से मजबूत रहा भारत

उन्होंने भारत के विकसित यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को उदाहरण के तौर पर पेश किया, जिसने वास्तविक समय में सुरक्षित और निर्बाध धन हस्तांतरण सुनिश्चित करने में सफलता हासिल की है। जयशंकर के अनुसार, आज दुनिया में कैशलेस भुगतान का आधा हिस्सा भारत के इस सिस्टम के जरिए होता है। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि भारत का निजी क्षेत्र सिका देशों में कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी जैसे क्षेत्रों में निवेश में रुचि रखता है, जिनमें भारत परंपरागत रूप से मजबूत रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं का समर्थन करने के लिए तैयार

जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक संघर्ष के संदर्भ में, विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि भारत की कई कंपनियों ने सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और बायोएनर्जी जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। ये क्षेत्र सहयोग के नए अवसर भी प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कोरोना महामारी के दौरान भारत ने सिका देशों को टीके उपलब्ध कराकर क्षेत्रीय संबंधों को मजबूत किया।

जयशंकर ने कहा कि भारत सिका देशों के साथ मिलकर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़ करने और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं का समर्थन करने के लिए तैयार है। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष सिका देशों में आए तूफानों ने बुनियादी ढांचे और आजीविका को भारी नुकसान पहुंचाया था। उस समय भारत ने एकजुटता का संदेश देते हुए जरूरी दवाइयाँ, राहत सामग्री और आपातकालीन सहायता प्रदान की थी।

(आईएएनएस इनपुट के साथ)

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