भारत व्यापार समझौतों के मामले में अमेरिका से आगे निकला (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

भारत की बड़ी जीत: व्यापार समझौतों में अमेरिका को पछाड़ा, ट्रंप की टैरिफ रणनीति हुई पूरी तरह फेल

India Trade Deals: भारत व्यापार समझौतों के मामले में अमेरिका से आगे निकल गया है। ट्रंप की टैरिफ नीति नाकाम रही है, जबकि भारत ने इस साल अमेरिका के मुकाबले दोगुने समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

प्रिया सिंह

India Leads Trade Agreements: विश्व व्यापार के बदलते परिदृश्य में भारत ने एक बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आंकड़ों के अनुसार, व्यापार समझौतों की दौड़ में अमेरिका अब काफी पीछे रह गया है। वेदा पार्टनर्स की रिपोर्ट बताती है कि ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियां उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं दे पा रही हैं। वॉशिंगटन में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी आर्थिक पकड़ मजबूत कर रहा है।

ट्रंप की विफल रणनीति

वेदा पार्टनर्स की को-फाउंडर हेनरीटा ट्रेज के अनुसार ट्रंप सरकार की टैरिफ वाली रणनीति का कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला है। वॉशिंगटन में इस बात पर हंगामा मचा हुआ है कि भारत ने इस साल डोनाल्ड ट्रंप से सौ फीसदी ज्यादा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। यह स्थिति अमेरिका के लिए चिंताजनक है क्योंकि भारत लगातार व्यापारिक समझौतों में अमेरिका से आगे निकल रहा है।

वादे और जमीनी हकीकत

ट्रंप सरकार ने 90 दिनों के भीतर 90 व्यापार समझौते करने का बड़ा वादा किया था जिसे पूरा करने में वे पूरी तरह विफल रहे हैं। असलियत यह है कि पिछले 10 महीनों में अमेरिका केवल कंबोडिया और मलेशिया के साथ ही दो छोटी डील करने में सफल हो पाया है। अमेरिकी सांसदों में इस बात को लेकर निराशा बढ़ रही है कि उनकी आक्रामक बातों को अब तक ठोस समझौतों में नहीं बदला जा सका है।

दक्षिण कोरिया के साथ संबंध

दक्षिण कोरिया के साथ होने वाली महत्वपूर्ण व्यापारिक डील भी फिलहाल आगे नहीं बढ़ पाई है जिससे अमेरिकी सांसद और प्रशासन काफी परेशान हैं। एक समय ऐसा था जब दक्षिण कोरिया के साथ 96 फीसदी व्यापार मुक्त व्यापार समझौते के तहत कवर होता था और टैरिफ बिल्कुल जीरो थे। अब टैरिफ को दबाव के तौर पर इस्तेमाल करने की नीति ईयू, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े साझेदारों पर काम नहीं कर रही है।

जनता का विरोध और दबाव

अमेरिका के भीतर भी टैरिफ नीतियों का कड़ा विरोध हो रहा है और 50 फीसदी नागरिक चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट इन्हें तुरंत खत्म कर दे। टैरिफ के प्रति इस जनविरोध ने सरकार के आर्थिक संदेश को कमजोर कर दिया है और कोई भी नया बड़ा ट्रेड समझौता सफल नहीं हो रहा है। राजनीतिक नतीजों का सामना करने का दबाव अब पूरी तरह से व्हाइट हाउस पर है क्योंकि राष्ट्रपति को अपने वोटरों का भरोसा फिर से जीतना है।

राजनीतिक असर और भविष्य

रुकी हुई व्यापारिक वृद्धि के कारण राष्ट्रपति ट्रंप और रिपब्लिकन कॉन्फ्रेंस की लोकप्रियता के ग्राफ में लगातार बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है। भले ही सरकार 'अमेरिका के साथ सेल करो' अप्रोच पर जोर दे रही है, लेकिन इसके बड़े राजनीतिक परिणामों को अब नजरअंदाज करना मुश्किल है। ट्रेड पॉलिसी फिलहाल एक बड़ी रुकावट बनी हुई है जो अमेरिकी आर्थिक सोच और उसकी वैश्विक साख पर बहुत भारी पड़ रही है।

Explainer: कब-कब विवादों में घिरे धीरेंद्र शास्त्री? 10 बयानों पर हुआ विरोध, कई बार मांगनी पड़ी माफी

Diwali Trains: मुंबई-नागपुर के बीच 12 और स्पेशल ट्रेनें चलेंगी, 4 नवंबर से शुरू होगी बुकिंग; जानिए शेड्यूल

राहुल ने PM मोदी को दी खुली चुनौती: बोले- डरिए मत, मंच पर आमने-सामने बैठिए; राजनाथ-समेत 4 नेताओं से की अपील

SIR: ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम गायब तो भी भर सकेंगे फॉर्म-6, चुनाव आयोग ने दी बड़ी राहत

दिवाली-छठ पर यूपी-बिहार वालों को ट्रेनों में मिल सकता है कन्फर्म टिकट, रेलवे चला रहा करीब 2,000 स्पेशल ट्रेनें