India Economy Growth Potential Conclave: कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 में विशेषज्ञों ने भारत की आर्थिक मजबूती पर चर्चा की। प्रसिद्ध अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की विकास क्षमता को सराहा।
कार्यक्रम दौरान अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु जोखिम व आपूर्ति शृंखला जैसे मुद्दों पर मंथन हुआ। विशेषज्ञों अनुसार कोरोना महामारी के बाद भारत ने असाधारण आर्थिक गति हासिल की है और विकास क्षमता मजबूत है।
हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव व वैश्विक आर्थिक संकटों के बीच विकास दर बनाए रखना चुनौती है। इसके बावजूद भारत में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर व विशाल बाजार क्षमता विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही है।
कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 में दुनिया भर से आए अर्थशास्त्रियों ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। स्वीडिश अर्थशास्त्री एरिक बर्गलोफ ने बताया कि सम्मेलन की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी में समय के साथ काफी सुधार आया है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों में आपूर्ति शृंखला व ऊर्जा सुरक्षा को लचीला बनाना आवश्यक है। एरिक बर्गलोफ ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद भारत ने तेजी से आर्थिक सुधार किया है और विकास की संभावनाएं मजबूत हैं। बर्गलोफ अनुसार ईरान से जुड़े संघर्ष और पश्चिम एशिया के तनाव का असर भारत सहित कई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने आम लोगों व व्यापार को राहत देने के प्रयास किए हैं, जिससे राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है। वैश्विक संकटों के बीच विकास की रफ्तार बनाए रखना भारतीय नीति निर्माताओं के लिए एक प्रमुख चुनौती के रूप में सामने आया है।
ब्राजील स्थित क्लाइमेट पॉलिसी इनिशिएटिव के निदेशक जुलियानो असुन्साओ ने जलवायु परिवर्तन को दुनिया का सबसे बड़ा साझा जोखिम बताया। उन्होंने कहा कि इस संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है और कोई भी देश अकेले इससे नहीं निपट सकता।
असुन्साओ अनुसार भारत और ब्राजील जलवायु परिवर्तन का सामना करने के साथ ही समाधान पेश करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स जैसे मंचों के जरिए दोनों देशों में मजबूत संबंध हैं और ब्राजील में भारतीय कंपनियों का निवेश बढ़ रहा है।
न्यूजीलैंड के अर्थशास्त्री प्रो. जॉन गिब्सन ने कहा कि कौटिल्य कॉन्क्लेव शोधकर्ताओं व नीति निर्माताओं के बीच संवाद का बड़ा केंद्र है। उन्होंने कहा कि बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुआ हालिया मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आर्थिक स्थिरता का उदाहरण है।
जापान के इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइकॉनॉमिक्स के निदेशक काजुतो सुजुकी ने कहा कि आज के दौर में अर्थव्यवस्था और जियोइकॉनॉमिक्स आपस में जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि चीन के साथ जटिल संबंधों के कारण जापानी उद्योग लंबे समय से भारत को एक सुरक्षित बाजार के रूप में देख रहे हैं।
सुजुकी अनुसार कई जापानी कंपनियां भारत में निवेश के अवसर तलाश रही हैं और देश को दीर्घकालिक विनिर्माण केंद्र मान रही हैं। भारत की विशाल बाजार क्षमता, जनसांख्यिकीय ताकत और आर्थिक विस्तार की संभावनाएं विदेशी निवेशकों को भारत की ओर आकर्षित कर रही हैं।