IMF ने पाकिस्तान को 1.2 अरब डॉलर फंड देने का ऐलान किया (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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शहबाज के काम आई ट्रंप की चापलूसी, पाकिस्तान को 1.2 अरब डॉलर का बेलआउट फंड देगा IMF, सऊदी ने भी की थी मदद

Pakistan News: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान को 1.2 अरब डॉलर जारी किए, जो 7 अरब डॉलर बेलआउट का हिस्सा है। यह सहायता टैक्स सुधार, ऊर्जा नीति बदलाव और आर्थिक स्थिरता शर्तों पर आधारित है।

अक्षय साहू

IMF Announces 1.2 Billion Dollar Fund for Pakistan: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान को लगभग 1.2 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता जारी करने की घोषणा की है, जो देश की गंभीर आर्थिक स्थिति के बीच एक बड़ी राहत मानी जा रही है। पाकिस्तान लंबे समय से उच्च मुद्रास्फीति, विदेशी मुद्रा संकट और ऊर्जा संकट जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, जहां महंगाई दर 22 प्रतिशत से भी अधिक पहुंच चुकी है।

IMF का यह फंड पाकिस्तान के मौजूदा 7 अरब डॉलर के बेलआउट प्रोग्राम का हिस्सा है। इस कार्यक्रम के तहत धनराशि किस्तों में जारी की जाती है और इसके लिए देश को IMF की तय शर्तों और सुधारों को पूरा करना होता है। हाल ही में IMF ने एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) की तीसरी समीक्षा और रेजिलियंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) की दूसरी समीक्षा को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद यह निर्णय लिया।

पाकिस्तान को किस लिए गया फंड

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान से टैक्स बेस बढ़ाने, खासकर कृषि, आईटी और रिटेल क्षेत्रों को कर दायरे में लाने, साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में सुधार करने की सिफारिश की है। इन शर्तों के चलते पाकिस्तान सरकार को हाल ही में बिजली दरों में बढ़ोतरी जैसे कठोर कदम उठाने पड़े।

इससे पहले IMF प्रतिनिधिमंडल ने फरवरी-मार्च में पाकिस्तान के कराची और इस्लामाबाद में बातचीत की थी, लेकिन प्रारंभिक दौर में कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका था। बाद में यह वार्ता वर्चुअल माध्यम से जारी रही और अंततः स्टाफ-लेवल समझौते पर सहमति बनी।

सऊदी अरब ने भी दिया 2 अरब डॉलर

वहीं, पाकिस्तान ने इस दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वित्तीय सहायता जुटाने की कोशिशें तेज की हैं। हाल ही में सऊदी अरब से लगभग 2 अरब डॉलर की सहायता की पुष्टि हुई है, जो उसके विदेशी मुद्रा भंडार को कुछ हद तक स्थिर करने में मदद करेगी।

विश्लेषकों का मानना है कि IMF के फैसलों में वैश्विक भू-राजनीतिक कारकों का भी प्रभाव होता है, क्योंकि अमेरिका IMF का सबसे बड़ा शेयरधारक है और उसके पास महत्वपूर्ण निर्णयों में प्रभावशाली भूमिका होती है। हालांकि IMF का कहना है कि फंड जारी करना मुख्य रूप से सुधारों और शर्तों के पालन पर आधारित होता है, न कि राजनीतिक दबाव पर।

पाकिस्तान के लिए उम्मीद की आस

अमेरिकी नेतृत्व को लेकर भी अलग-अलग राय सामने आती रही हैं, लेकिन IMF के नियमों के तहत हर देश को निर्धारित आर्थिक सुधारों को पूरा करना जरूरी होता है। पाकिस्तान के लिए यह सहायता फिलहाल एक राहत जरूर है, लेकिन दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए उसे संरचनात्मक सुधारों को लगातार लागू करना होगा।

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