Imaan Mazari Rearrest PoJK Case: मानव अधिकार अधिवक्ता इमान मजारी और हादी अली चट्टा की दोबारा गिरफ्तारी पर विवाद गहरा गया है। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर के मानवाधिकार परिषद (HRC-PoJK) ने इस अचानक हुई कार्रवाई पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने और सजा निलंबित होने के तुरंत बाद इस्लामाबाद के कोहसार पुलिस स्टेशन में दर्ज नए मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया। मानवाधिकार परिषद ने राज्य प्राधिकारियों से इस गिरफ्तारी का स्पष्ट कानूनी आधार और सार्वजनिक कारण बताने की मांग की है।
मुजफ्फराबाद स्थित HRC-PoJK ने शनिवार, 19 सितंबर 2026 को जारी बयान में इमान मजारी और हादी अली चट्टा की पुनर्गिरफ्तारी पर सवाल उठाए। परिषद के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था।
हालांकि, इस न्यायिक आदेश के तुरंत बाद दोनों को इस्लामाबाद के कोहसार पुलिस स्टेशन में दर्ज एक नए मामले में फिर से हिरासत में ले लिया गया। HRC-PoJK ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के जरिए संबंधित अधिकारियों से पुनर्गिरफ्तारी की परिस्थितियों और कानूनी आधार की पारदर्शी जानकारी देने की मांग की।
परिषद ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत जांच और मुकदमा चलाने का अधिकार राज्य के पास है, लेकिन न्यायिक आदेश के तुरंत बाद हुई कार्रवाई के कारण इसके कानूनी आधार को स्पष्ट करना जरूरी है।
पुनर्गिरफ्तारी के बाद इमान मजारी और हादी अली चट्टा को एंटी टेररिज्म कोर्ट यानी ATC के सामने पेश किया गया। सुनवाई के दौरान पुलिस ने दोनों की 30 दिनों की फिजिकल रिमांड की मांग की।
हालांकि, अदालत ने पुलिस की 30 दिन की रिमांड की मांग को स्वीकार नहीं किया। इसके बजाय दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया गया।
इस घटनाक्रम के बाद HRC-PoJK ने न्यायिक आदेशों के सम्मान और निष्पक्ष अदालती प्रक्रिया की जरूरत पर जोर दिया। परिषद ने कहा कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।
मानवाधिकार परिषद ने कहा कि राज्य कानून के अनुसार किसी भी नागरिक के खिलाफ जांच और मुकदमा चला सकता है। हालांकि, गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया के हर चरण में संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन जरूरी है।
परिषद ने अधिकारियों से इमान मजारी और हादी अली चट्टा की पुनर्गिरफ्तारी की आवश्यकता और उसके कानूनी आधार को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने का आग्रह किया। HRC-PoJK ने कहा कि न्यायिक आदेशों का सम्मान, कानून का समान इस्तेमाल और निष्पक्ष सुनवाई आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों का हिस्सा हैं।
परिषद ने दोनों के कानूनी और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पूरी कार्रवाई को पारदर्शी रखने की मांग की है।
HRC-PoJK ने अपने बयान में शौकत नवाज मीर की कस्टडी और कानूनी स्थिति से जुड़े पहले के मामले का भी उल्लेख किया। परिषद ने कहा कि उस मामले में अलग-अलग तरह के बयान सामने आने के बाद उसने तत्काल और सत्यापन योग्य स्पष्टीकरण की मांग की थी।
30 जून 2026 को शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी की खबरें राष्ट्रीय मीडिया में सामने आई थीं। समाचार रिपोर्टों में मुजफ्फराबाद के डिप्टी कमिश्नर के हवाले से उनकी गिरफ्तारी की जानकारी दी गई थी।
अब परिषद ने एक बार फिर राज्य संस्थाओं से नागरिकों के अधिकारों और कानून के शासन को बनाए रखने की अपील की है। इमान मजारी और हादी अली चट्टा की दोबारा गिरफ्तारी के मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत की कार्यवाही पर नजर बनी हुई है।