

India Bangladesh Bilateral Agreements Review: बांग्लादेश की नई सरकार ने भारत के साथ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में हुए 101 द्विपक्षीय समझौतों और सहमति पत्रों की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली इस नई सरकार द्वारा की जा रही इस प्रक्रिया पर भारत सरकार ने पैनी नजर बना रखी है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर इस समीक्षा प्रक्रिया से भारत के राष्ट्रीय हित प्रभावित होते हैं, तो भारत अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। हालांकि ढाका प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन सभी समझौतों को पूरी तरह से रद्द करने की कोई योजना नहीं है, बल्कि कमियों को दूर करना ही इसका मुख्य उद्देश्य है।
बांग्लादेश में शेख हसीना के शासनकाल के दौरान भारत के साथ कुल 101 द्विपक्षीय समझौतों और MoU पर हस्ताक्षर किए गए थे। अब तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार ने इन समझौतों की नए सिरे से समीक्षा शुरू की है। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि समीक्षा का उद्देश्य इन समझौतों में मौजूद कमियों, विसंगतियों और ऐसे प्रावधानों की पहचान करना है, जिनमें बदलाव की जरूरत महसूस होती है।
सरकार इन समझौतों को बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दे रही है। ढाका ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी समझौतों को एक साथ रद्द करने की कोई योजना नहीं है। समीक्षा का मकसद मौजूदा व्यवस्थाओं में सुधार करना और जरूरत के अनुसार उनमें बदलाव करना बताया गया है।
101 समझौतों की समीक्षा के दायरे में कई अहम क्षेत्र शामिल हैं। इनमें बंदरगाहों का इस्तेमाल, सीमा पार कनेक्टिविटी, व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और बुनियादी ढांचे से जुड़े समझौते प्रमुख हैं।भारत के लिए चटगांव और मोंगला बंदरगाहों से जुड़ी व्यवस्थाएं विशेष महत्व रखती हैं। इन बंदरगाहों के जरिए भारत को बांग्लादेश के रास्ते अपने पूर्वोत्तर राज्यों तक सामान पहुंचाने का वैकल्पिक मार्ग मिलता है।
इससे परिवहन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा मिलता है। बांग्लादेश के मुख्य सचेतक नुरुल इस्लाम मोनी ने चटगांव बंदरगाह से संबंधित व्यवस्थाओं और उनकी शर्तों पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा भारत की ओर से दी गई लाइन ऑफ क्रेडिट के तहत चल रही विकास परियोजनाओं की शर्तों की भी समीक्षा की जा रही है।
बांग्लादेश की समीक्षा प्रक्रिया पर भारत सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस संबंध में बांग्लादेश की ओर से भारत को कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि फिलहाल भारत ने इस मामले में सामने आई मीडिया रिपोर्टों का ही संज्ञान लिया है।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर समीक्षा के दौरान ऐसे फैसले लिए जाते हैं, जिनसे भारत के रणनीतिक, आर्थिक या सीमा पार हित प्रभावित होते हैं, तो वह अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
विदेश मंत्रालय के रुख के मुताबिक, भारत अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर नजर बनाए हुए है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में सड़क, रेल, जलमार्ग, व्यापार और बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में व्यापक सहयोग विकसित हुआ है।
भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से आर्थिक और रणनीतिक सहयोग का एक बड़ा नेटवर्क मौजूद है। सीमा पार व्यापार से लेकर परिवहन और ऊर्जा तक दोनों देशों के बीच कई समझौते लागू हैं। ऐसे में 101 समझौतों की समीक्षा दोनों देशों के भविष्य के द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
ढाका की ओर से यह प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है और किन समझौतों में बदलाव प्रस्तावित किए जाते हैं, इससे भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा पर असर पड़ सकता है। फिलहाल बांग्लादेश ने समझौतों को पूरी तरह खत्म करने की बात नहीं कही है, जबकि भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।